पाकिस्तान की सेना के मौजूदा प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर, आज पाकिस्तान की सत्ता में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बन चुके हैं। उनकी ताकत सिर्फ बंदूक या वर्दी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब वह पाकिस्तान की विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा, और भारत के प्रति रणनीति तक तय कर रहे हैं। हाल ही में हुए 27वें संविधान संशोधन ने उन्हें वह शक्ति दे दी है जो पहले किसी पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष को नहीं मिली थी — तीनों सशस्त्र बलों के साथ-साथ परमाणु हथियारों का नियंत्रण भी अब उनके हाथ में है।

यह कदम उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य शासक बना देता है, ठीक वैसे ही जैसे कभी जनरल जिया-उल-हक या परवेज़ मुशर्रफ थे। लेकिन असीम मुनीर सिर्फ सत्ता संभालने तक नहीं रुके हैं — उन्होंने भारत के खिलाफ एक नई वैचारिक जंग छेड़ दी है।
‘ब्लीड इंडिया’ रणनीति की वापसी?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया विश्लेषणों से संकेत मिल रहे हैं कि असीम मुनीर अब परवेज़ मुशर्रफ की पुरानी “हज़ार घावों से मौत” (Death by a Thousand Cuts) वाली रणनीति को दोहराने की तैयारी में हैं। यह वही नीति थी जिसके तहत पाकिस्तान ने भारत को सीधे युद्ध में उलझाने के बजाय लगातार आतंकी हमलों, सीमा पर घुसपैठ, और देश के अंदर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की थी।
मुशर्रफ के शासनकाल में भारत को कारगिल युद्ध, संसद हमले, और मुंबई बम धमाकों जैसी बड़ी घटनाओं का सामना करना पड़ा। अब मुनीर भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं — लेकिन कहीं ज्यादा तकनीकी और रणनीतिक अंदाज़ में।
दिल्ली ब्लास्ट और आतंकी नेटवर्क की नई कड़ी
10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद भारत की एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी सेल का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क पाकिस्तान की ISI की निगरानी में काम कर रहा था, और इसका संचालन सीधे मुनीर के इशारों पर हो रहा था। इसका मकसद देश के भीतर कई शहरों में धमाके कर भारत में भय का माहौल बनाना था। मुनीर की “ब्लीड इंडिया प्रोजेक्ट” की यह झलक साफ करती है कि पाकिस्तान अब फिर से आतंक को कूटनीति के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
भारत के खिलाफ वैचारिक युद्ध
मुनीर का रुख न सिर्फ रणनीतिक है बल्कि वैचारिक भी। उन्होंने अगस्त 2025 में अमेरिका में पाकिस्तानी प्रवासियों से कहा था कि “भारत एक चमकदार कार है और पाकिस्तान बजरी से भरा ट्रक — हमें कार को टक्कर मारनी है, चाहे खुद भी क्यों न टूट जाएं।” यह बयान उनके सोच की दिशा दिखाता है — पाकिस्तान की असफलताओं की भरपाई भारत को नुकसान पहुंचाकर करनी है।
उनके नेतृत्व में पाक सेना अब एक ‘जिहादी फोर्स’ के रूप में खुद को फिर से स्थापित कर रही है। दक्षिणपंथी धार्मिक संगठनों के साथ सेना की साझेदारी बढ़ रही है। मदरसों में मिलिटेंट विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है, और युवाओं को भारत विरोधी नैरेटिव में ढाला जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद का बदला
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठा को गहरा झटका दिया था। भारत की सटीक कार्रवाई में पाकिस्तानी इन्फ्रास्ट्रक्चर और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद से असीम मुनीर भारत के प्रति खुली शत्रुता दिखा रहे हैं। उन्होंने परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी तक दी, लेकिन भारत के सख्त रुख ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया।
27वां संविधान संशोधन: सेना को मिला सर्वोच्च दर्जा
इस संशोधन के तहत मुनीर अब चीफ डिफेंस फोर्स (CDF) बन जाएंगे, जो तीनों सेनाओं और परमाणु बम के नियंत्रण के प्रमुख होंगे। इससे पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार मात्र दिखावा बनकर रह जाएगी। विश्लेषक मानते हैं कि यह संशोधन पाकिस्तान को ‘सैन्य राजतंत्र’ की दिशा में ले जा रहा है।
भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती
असीम मुनीर की रणनीति सिर्फ आतंक तक सीमित नहीं है। वह सोशल मीडिया और प्रोपेगेंडा मशीनरी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर टेररिज़्म, डिजिटल डिसइन्फॉर्मेशन और फेक नैरेटिव अब उनके हथियार हैं। भारत के अंदर सांप्रदायिक तनाव भड़काने, अफवाहें फैलाने और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने की कोशिशें इसी एजेंडे का हिस्सा हैं।
आगे की राह क्या होगी?
भारत के लिए यह समय बेहद सजग रहने का है। पाकिस्तान के अंदर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है — और ऐसे में सेना भारत विरोध को आंतरिक एकता का औजार बना रही है। लेकिन भारत अब 1999 वाला भारत नहीं है। नई तकनीक, मजबूत खुफिया नेटवर्क, और स्पष्ट विदेश नीति के चलते भारत अब हर मोर्चे पर तैयार है।
निष्कर्ष
असीम मुनीर का बढ़ता वर्चस्व पाकिस्तान को भीतर से खोखला और भारत के लिए अस्थिर करने वाला बनाता जा रहा है। “हजार घावों” की रणनीति दोहराने की कोशिश करने वाला यह नया सैन्य तानाशाह शायद यह भूल रहा है कि अब भारत हर घाव का जवाब surgical precision से देता है।
