मध्यप्रदेश के हरदा जिले में जनजातीय कार्य विभाग के कर्मचारियों के धैर्य का बांध आखिरकार टूट गया। तीन महीनों से मानदेय न मिलने, महंगाई भत्ते (DA) में लंबित वृद्धि और कई अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों ने शुक्रवार की शाम भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुँचकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है, और अब परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

भीड़ शांतिपूर्ण थी, परंतु चेहरे पर आक्रोश साफ दिख रहा था। हाथों में कई मांगों को लेकर लिखे बैनर, नारों के बीच में कर्मचारियों ने अपनी आवाज़ बुलंद की—
“मानदेय हमारा अधिकार है, समय पर भुगतान करो सरकार!”
“DA वृद्धि तुरंत लागू करो”
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण रहा वह ज्ञापन, जिसे कर्मचारियों ने संयुक्त कलेक्टर रजनी वर्मा को सौंपा। यह ज्ञापन केवल एक औपचारिक पत्र नहीं बल्कि कर्मचारियों की मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ा का दर्पण था।
मानदेय तीन महीने से रुका—कर्मचारी कह रहे हैं, अब जीना मुश्किल
कर्मचारियों का सबसे बड़ा आरोप यही है कि पिछले तीन महीनों से उनका मानदेय रोका हुआ है। कई लोगों के बच्चों की फीस बाकी है, घर का राशन उधार में चल रहा है, और परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो चुका है।
ग्राम दारा के एक कर्मचारी ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा—
“हम जनजातीय बच्चों के उत्थान के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन जब अपना ही वेतन समय पर नहीं मिलता, तो कैसे परिवार चलाएँ? यह सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, मानसिक तनाव भी है।”
कई कर्मचारियों ने बताया कि समय पर भुगतान न होना हमेशा से समस्या रही है, लेकिन इस बार देरी असहनीय स्तर पर पहुँच गई है।
DA बढ़ोतरी महीनों से लंबित – कर्मचारियों में नाराज़गी
एक और बड़ी शिकायत यह है कि महंगाई भत्ते (DA) की निर्धारित बढ़ोतरी को विभाग ने अब तक लागू नहीं किया है।
जबकि अन्य विभागों में यह वृद्धि लागू हो चुकी है, जनजातीय कार्य विभाग के कर्मचारियों को प्रतीक्षा में रखा गया है।
“हम भी सरकारी कर्मचारी हैं। जिस तरह अन्य विभागों में DA दिया जाता है, उसी तरह हमें भी दिया जाना चाहिए,”
एक महिला कर्मचारी ने कहा।
नियुक्ति प्रक्रिया, पदस्थापन और कार्यभार वितरण में अनियमितताएँ
ज्ञापन के अनुसार, कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जबकि कुछ लोगों पर एक से अधिक स्कूलों का भार डाल दिया गया है।
इस असमानता के कारण कर्मचारियों में रोष है।
कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में पारदर्शिता की कमी है और कुछ स्थानों पर पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं।
भारतीय मजदूर संघ का नेतृत्व—कर्मचारियों की ताकत बना
भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने इस विरोध प्रदर्शन में केंद्रीय भूमिका निभाई। संगठन के नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा:
“यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान का प्रश्न है। जो कर्मचारी बच्चों के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं, उनके साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं।”
संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्याएँ हल नहीं हुईं, तो विरोध को जिला और राज्य स्तर पर तेज किया जाएगा।
संयुक्त कलेक्टर रजनी वर्मा को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन
ज्ञापन में शामिल प्रमुख माँगें थीं:
- तीन महीनों का रोका गया मानदेय तुरंत जारी किया जाए
- DA वृद्धि तुरंत लागू की जाए
- पदस्थापन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
- कार्यभार का समुचित वितरण हो
- विभागीय स्तर पर उत्पीड़न और अनदेखी को रोका जाए
- कर्मचारियों के लिए सुविधाएँ और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद संयुक्त कलेक्टर रजनी वर्मा ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
हालांकि कर्मचारी इस आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने स्पष्ट कहा—
“अब केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।”
प्रदर्शन का माहौल—शांत लेकिन दृढ़
विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन कर्मचारियों की दृढ़ता और एकजुटता देखने लायक थी।
कई वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्हें इस स्तर पर विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बैनरों पर लिखे संदेश स्पष्ट थे:
“समय पर भुगतान दो”
“कर्मचारियों की उपेक्षा बंद करो”
जनजातीय विभाग के विद्यालयों पर प्रभाव
मानदेय रोकने और कर्मचारियों में असंतोष का सबसे बड़ा प्रभाव क्षेत्र के जनजातीय बच्चों पर देखा जा रहा है।
कई कर्मचारियों ने बताया कि आर्थिक तनाव के कारण वे अपने काम पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।
यह बच्चों की शिक्षा और व्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहा है, जो विभाग के उद्देश्य के विपरीत है।
कर्मचारियों की आवाज अब तेज हो चुकी है
जनजातीय कार्य विभाग के कर्मचारी इस बात पर अडिग हैं कि जब तक उनकी समस्याएँ हल नहीं होंगी, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
वे कहते हैं—
“हम सेवाएँ देते रहेंगे, लेकिन अपने अधिकारों के लिए लड़ाई भी जारी रखेंगे।”
अगली बड़ी कार्रवाई क्या होगी?
सूत्रों के अनुसार, यदि जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा, तो कर्मचारी:
- जिला कार्यालय का घेराव
- भोपाल जाकर सामूहिक प्रदर्शन
- विभागीय अधिकारियों से सीधा संवाद
जैसी कार्रवाइयों के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही, भारतीय मजदूर संघ ने भी संकेत दिया है कि वह कर्मचारियों की लड़ाई को राज्य स्तर तक ले जा सकता है।
