मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में इन दिनों किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। शाहपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से अधिक गाँवों के लोग लंबे समय से बिजली संकट से परेशान थे, पर जब विभाग द्वारा कोई समाधान नहीं मिला, तो किसानों ने आंदोलन का रास्ता चुन लिया। बिजली विभाग की लापरवाही, भ्रष्टाचार के आरोप, ट्रांसफार्मरों की खराबी और बिजली कटौती ने ग्रामीणों को इतना बेचैन कर दिया कि उन्होंने आखिरकार रामपुर सब-स्टेशन का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

यह सामान्य विरोध नहीं था—ग्रामीणों ने बिजली विभाग की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर, मंत्रोच्चार और नारेबाजी के बीच अपना आक्रोश ऐसी शैली में व्यक्त किया कि जिसे जिसने देखा, वह दंग रह गया। ग्रामीणों का यह विरोध केवल बिजली कटौती का प्रश्न नहीं रहा, यह बदल गया है—उनके सम्मान, अधिकार और जीविका की लड़ाई में।
बिजली समस्या इतनी भयावह कि किसानों के खेत, घर और पशुपालन सभी प्रभावित
रामपुर सब-स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गाँव—बोरगांव, चोपना, नयागांव, झल्लार, ढाना और अन्य ग्रामीण बस्तियों के किसान लगातार बिजली की समस्या झेल रहे हैं। कई जगहों पर चार-चार महीने से ट्रांसफॉर्मर खराब पड़े हैं, जिनकी मरम्मत के लिए विभाग के कर्मचारी या अधिकारी कभी नहीं पहुँचे।
बिजली न होने से:
- खेतों में सिंचाई पूरी तरह बंद
- पेयजल मोटर नहीं चल पा रही
- पशुओं के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं
- ग्रामीण घर अंधेरे में डूबे हुए
- छोटे व्यवसाय पूरी तरह ठप
किसानों के अनुसार, बिजली कटौती की स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार दोपहर से लेकर अगले दिन तक बिजली नहीं आती। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते और खेती का काम लगातार पीछे हो रहा है।
विभाग पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
गाँववालों ने बिजली विभाग पर एक नहीं, कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- बिजली बिल जमा करने के नाम पर पैसा उगाही
- ट्रांसफार्मर लगवाने या मरम्मत करवाने के लिए रिश्वत की मांग
- लाइनमैन द्वारा मनमानी और देरी
- कनेक्शन जोड़ने में जानबूझकर समय लगाना
- बकाया बिल न होने पर भी कनेक्शन काट देना
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग वर्षों से उनकी समस्याओं को टालता आ रहा है। कुल मिलाकर, वे कहते हैं कि—
“बिजली विभाग अब सेवा नहीं, बल्कि वसूली का अड्डा बन गया है।”
जब सब्र का बांध टूटा—प्रदर्शन ने उग्र रूप लिया
शुक्रवार सुबह से सैकड़ों किसान सब-स्टेशन के सामने जमा होने लगे।
बैनर पर लिखा था—
“बिजली दो या पद छोड़ो!”
“हम हक मांगते हैं, भीख नहीं!”
“ट्रांसफार्मर बदलो, भ्रष्टाचार बंद करो!”
ग्रामीणों ने बिजली विभाग की अर्थी उठाई, पारंपरिक तरीके से चार लोग कंधा देकर अर्थी लेकर चले, और पीछे-पीछे भीड़ नारे लगाती हुई आगे बढ़ रही थी—
“बिजली विभाग मुर्दाबाद!”
“किसान एकता जिंदाबाद!”
“किसान परेशान है, बिजली विभाग अंधा है!”
यह दृश्य किसी बड़े जनाक्रोश का संकेत था।
सब-स्टेशन घेराव—अधिकारियों पर दबाव बढ़ा
अर्थी यात्रा के बाद किसान सीधे सब-स्टेशन के गेट पर जा बैठे और वहीं सड़क जाम कर धरने पर बैठ गए।
बिजली विभाग के अधिकारी जब वहाँ पहुँचे, तो उन्हें किसानों के सवालों और गुस्से का सामना करना पड़ा।
एक किसान ने कहा—
“हमारे खेत सूख रहे हैं, बच्चे परेशान हैं, और आप लोग आराम से बैठे रहते हो। चार महीने से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है, कोई पूछने वाला नहीं!”
दूसरे किसान बोले—
“हर बार कहते हो कि एक हफ्ते में ठीक हो जाएगा। हम यह झूठ बार-बार नहीं सुनेंगे!”
अधिकारियों ने दिया लिखित आश्वासन—7 दिन में हल होने का वादा
काफी बहस और नारेबाजी के बाद बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने लिखित में आश्वासन दिया कि:
- सभी खराब ट्रांसफॉर्मरों को एक हफ्ते में बदला जाएगा या ठीक किया जाएगा
- पुराने और टूटी बिजली लाइनों की मरम्मत की जाएगी
- अवैध वसूली में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी
- ग्रामीणों की समस्याएँ प्राथमिकता पर हल की जाएँगी
लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त किया, लेकिन चेतावनी देते हुए कहा—
“अगर 7 दिन में काम नहीं हुआ तो यह आंदोलन शांत नहीं रहेगा। अगली बार तालाबंदी और सड़क बंद की जाएगी।”
किसानों के आक्रोश की जड़—सरकार तक पहुँचने वाला दर्द
किसान बताते हैं कि बिजली समस्या केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, यह उनके जीवन का संकट है।
कई किसान धान, सोयाबीन और तिल्ली की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
कुछ किसानों ने कहा कि उनकी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
एक बुजुर्ग किसान की आवाज़ दर्द से भरी थी—
“सरकार बोलती है किसानों की आय दोगुनी होगी। ये बताओ कि बिजली न हो तो किसान करेगा क्या?”
यह आंदोलन क्या संकेत देता है?
यह आंदोलन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या केवल बैतूल तक सीमित नहीं है।
मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान ऐसी ही समस्याओं से जूझ रहे हैं।
बैतूल के किसान अब खुलकर कह रहे हैं—
“अब बिजली विभाग को जगाना ही होगा।”
