मुख्य बातें
- CJP नेता अभिजीत दीपके 30 अक्टूबर को दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट देखने पहुंचे।
- जून में छात्र आंदोलन को लेकर दिलजीत की टिप्पणी से दीपके आहत हुए थे।
- कॉन्सर्ट के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर खुले पत्र में अपनी नाराजगी और सिंगर के प्रति सम्मान दोनों जाहिर किए।
- दीपके ने कहा कि एक असहमति या गलतफहमी से दिलजीत के प्रति उनका सम्मान और प्रशंसा कम नहीं हुई है।

जून में छात्र आंदोलन को लेकर दिलजीत दोसांझ की टिप्पणी से नाराज हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके अब उनके कॉन्सर्ट में पहुंचे। 30 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम देखने के बाद दीपके ने सोशल मीडिया पर सिंगर के नाम एक खुला पत्र साझा किया। इसमें उन्होंने पुरानी नाराजगी का जिक्र करते हुए साफ किया कि राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर असहमति होने के बावजूद दिलजीत के प्रति उनका सम्मान और प्रशंसा बरकरार है।
इस घटनाक्रम की खास बात यह है कि दीपके ने अपने पुराने विरोध को छिपाने के बजाय उसका कारण बताया और साथ ही सिंगर के संगीत तथा उनके व्यक्तित्व के प्रति अपनी सराहना भी दोहराई। उन्होंने दिलजीत को पंजाबी अंदाज में संबोधित करते हुए लिखा कि उन्हें छोटा भाई समझकर पुरानी बात को पीछे छोड़ दिया जाए।
कॉन्सर्ट के बाद साझा किया खुला पत्र
अभिजीत दीपके ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट देखा। कार्यक्रम के बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सिंगर के साथ जुड़ी तस्वीर साझा की और उनके नाम एक नोट लिखा। इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि जून में छात्र प्रदर्शन के दौरान दिलजीत की टिप्पणी उन्हें अच्छी नहीं लगी थी।
दीपके के मुताबिक, उनकी नाराजगी किसी निजी दुश्मनी की वजह से नहीं थी। वह दिलजीत को ऐसे कलाकार के रूप में देखते रहे हैं, जो सही मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। इसी अपेक्षा के कारण उस समय की टिप्पणी से उन्हें निराशा हुई थी।
उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं। इस साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में भी उनके कॉन्सर्ट में शामिल हुए थे। उनके अनुसार, दिलजीत के प्रति सम्मान केवल उनके संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पहचान, साहस और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के तरीके से भी है।
‘एक असहमति से सम्मान नहीं बदलता’
अपने पत्र में दीपके ने स्वीकार किया कि किसी सार्वजनिक मुद्दे पर अलग राय होने से उनके मन में दिलजीत के लिए बनी प्रशंसा खत्म नहीं हुई। उन्होंने लिखा कि कलाकार की एक टिप्पणी से उनके प्रति वर्षों से बना सम्मान नहीं बदल सकता।
दीपके ने दिलजीत की इस बात की भी सराहना की कि वह अपनी पंजाबी पहचान से जुड़े रहते हुए भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा रहे हैं। उनके पत्र का संदेश नाराजगी को पूरी तरह नकारना नहीं, बल्कि असहमति और व्यक्तिगत सम्मान के बीच अंतर बनाए रखना था।
पोस्ट के आखिर में उन्होंने दिलजीत को ‘पाजी’ कहकर संबोधित किया और खुद को उनका छोटा भाई बताते हुए पुरानी बात भुलाने की अपील की। उन्होंने दिलजीत के गाने ‘G.O.A.T.’ की एक पंक्ति भी साझा की, जिसमें विरोधियों के साथ भी मिठास और शालीनता से पेश आने का भाव है।
क्या था जून का विवाद?
विवाद की शुरुआत जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई थी। उस समय एक इंस्टाग्राम लाइव सत्र में दिलजीत से आंदोलन के बारे में सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा था कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों और ऐसी गतिविधियों से दूर रखा जाए, क्योंकि वह कलाकार हैं, राजनेता नहीं।
उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया में हर चीज हमेशा सही नहीं हो सकती। बातचीत के दौरान दिलजीत ने गुरु ग्रंथ साहिब की पंक्ति ‘नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम आधार’ का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि उनका नाम अक्सर ऐसे मामलों में खींचा जाता है, जबकि वह दोनों पक्षों के लिए अच्छा चाहते हैं। साथ ही, उन्होंने आंदोलन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होने की बात कही थी।
इस टिप्पणी के बाद आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों और दिलजीत के प्रशंसकों में निराशा सामने आई थी। अभिजीत दीपके भी उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने सिंगर के बयान पर आपत्ति जताई थी।
जुलाई में छात्रों के समर्थन में आए थे दिलजीत
जून की टिप्पणी के करीब एक महीने बाद दिलजीत ने छात्र आंदोलन को लेकर फिर अपनी बात रखी थी। 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के समर्थन में पोस्ट साझा किया था।
उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निंदा की और अधिकारियों से छात्रों की मांगों को सुनने की अपील की थी। अपनी पोस्ट में उन्होंने लोगों की आवाज को महत्व देने की बात कही थी।
दिलजीत ने यह भी बताया था कि किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के बाद उन्हें कई बार ‘देश विरोधी’ कहा गया और आलोचना के साथ कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनके इस पुराने अनुभव का जिक्र छात्र आंदोलन पर उनकी बाद की प्रतिक्रिया में भी सामने आया था।
अभिजीत दीपके का ताजा पत्र इसी पूरे घटनाक्रम के बीच आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दिलजीत दोसांझ की ओर से इस खुले पत्र पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल इस मुलाकात और पोस्ट को दोनों के बीच पुराने विवाद पर दीपके की ओर से अपनापन जताने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
FAQ’s
1. अभिजीत दीपके दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में कब पहुंचे थे?
अभिजीत दीपके 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर सिंगर के नाम एक खुला पत्र साझा किया।
2. अभिजीत दीपके दिलजीत दोसांझ से नाराज क्यों थे?
जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान दिलजीत से आंदोलन के बारे में सवाल पूछा गया था। उन्होंने खुद को कलाकार बताते हुए विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने की बात कही थी। इसी टिप्पणी से दीपके आहत हुए थे।
3. CJP नेता अभिजीत दीपके ने खुले पत्र में क्या कहा?
दीपके ने लिखा कि जून की टिप्पणी से उन्हें दुख हुआ था, लेकिन इससे दिलजीत के प्रति उनका सम्मान खत्म नहीं हुआ। उन्होंने सिंगर के संगीत, साहस और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के तरीके की प्रशंसा भी की।
4. दिलजीत दोसांझ ने छात्र आंदोलन पर बाद में क्या कहा था?
20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के बाद दिलजीत ने छात्रों के समर्थन में पोस्ट साझा किया था। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निंदा की और अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की थी।
5. क्या दिलजीत दोसांझ ने अभिजीत दीपके के खुले पत्र का जवाब दिया है?
उपलब्ध समाचार जानकारी में दिलजीत की ओर से इस खुले पत्र पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों के बीच औपचारिक बातचीत या विवाद का समाधान हो चुका है।
6. अभिजीत दीपके ने दिलजीत को ‘छोटा भाई समझकर मिट्टी पाओ’ क्यों कहा?
यह पंजाबी अंदाज में पुरानी नाराजगी को पीछे छोड़ने और अपनापन बनाए रखने की अपील है। दीपके ने इस संबोधन के जरिए स्पष्ट किया कि असहमति के बावजूद वह दिलजीत को पसंद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।






