मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक बार फिर चाइनीज मांझे ने यह साबित कर दिया कि प्रतिबंध सिर्फ कागजों में रह जाए, तो वह आम लोगों की जान पर भारी पड़ सकता है। सड़क पर फैला एक पतला सा धागा, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, इस बार एक मेहनतकश परिवार की खुशियों को लीलने ही वाला था। बेनटेक्स ज्वेलरी बेचकर अपने परिवार का पेट पालने वाले रामगिरी गोस्वामी उस मांझे की चपेट में आए, जिसने कुछ ही पलों में उनका गला इतनी बुरी तरह काट दिया कि आहार नली तक दिखाई देने लगी।

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही, अवैध बिक्री और आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता का आईना है। रामगिरी की जान बच गई, लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि अगला शिकार कौन होगा।
रोजमर्रा की तरह निकले थे, किसी ने नहीं सोचा था कि रास्ता जानलेवा बन जाएगा
2 जनवरी की शाम रामगिरी गोस्वामी अपनी पत्नी के साथ रोज की तरह काम निपटाकर घर लौट रहे थे। उनका रास्ता चांद, बीसापुर कला और लिंगा होते हुए छिंदवाड़ा की ओर जाता है। यह रास्ता उनके लिए नया नहीं था। सालों से वे इसी मार्ग से आना-जाना करते रहे थे। बाइक पर पीछे बैठी पत्नी के साथ वे सामान्य बातचीत करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
लेकिन चंदन गांव के पास स्थित शराब भट्टी के नजदीक सड़क पर फैला चाइनीज मांझा उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान बन गया। तेज धार वाला यह मांझा अचानक उनके गले में लिपट गया। पलक झपकते ही उनका गला कट गया और बाइक पर ही खून बहने लगा।
एक पल में बदला सब कुछ, सड़क पर मचा हड़कंप
मांझा लगते ही रामगिरी के मुंह से तेज चीख निकली। दर्द असहनीय था और संतुलन बिगड़ने लगा। गले से बहता खून देखकर उनकी पत्नी घबरा गई, लेकिन हालात को संभालने की कोशिश की। सड़क पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य डरावना था। कोई समझ नहीं पा रहा था कि आखिर हुआ क्या है। कुछ ही पलों में रामगिरी खून से लथपथ हो चुके थे।
चाइनीज मांझे की धार इतनी तेज थी कि उसने त्वचा, मांस और नसों को काटते हुए गहराई तक जख्म कर दिया था। यह कोई साधारण चोट नहीं थी, बल्कि सीधे जान पर हमला था।
पत्नी की सूझबूझ ने रोकी मौत की रफ्तार
ऐसे हालात में जहां अक्सर लोग घबरा जाते हैं, वहीं रामगिरी की पत्नी ने असाधारण साहस और समझदारी दिखाई। उन्होंने बिना समय गंवाए अपने दुपट्टे और रुमाल से रामगिरी के गले को कसकर बांधा ताकि खून का बहाव रोका जा सके। यह फैसला बेहद अहम साबित हुआ।
इसके बाद उन्होंने तुरंत रामगिरी के दोस्तों और परिचितों को फोन किया। कुछ ही समय में मदद पहुंची और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि अगर कुछ मिनट और देरी हो जाती, तो शायद रामगिरी को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता।
अस्पताल में शुरू हुआ जिंदगी और मौत का संघर्ष
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने रामगिरी की हालत देख कर स्थिति की गंभीरता को समझ लिया। चाइनीज मांझे से हुआ घाव इतना गहरा था कि आहार नली तक दिखाई दे रही थी। संक्रमण का खतरा अलग से था और खून की कमी भी तेजी से बढ़ रही थी।
डॉक्टरों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया। अलग-अलग समय पर तीन जटिल ऑपरेशन किए गए। कुल 43 टांके लगाए गए। हर ऑपरेशन अपने आप में एक चुनौती था क्योंकि गर्दन का हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है। थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी।
चार दिन अस्पताल में रहे भर्ती, तब जाकर आई राहत
लगातार चार दिन तक रामगिरी अस्पताल में भर्ती रहे। इस दौरान उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों ने हर कदम बेहद सावधानी से उठाया। संक्रमण न फैले, इसके लिए विशेष दवाइयां दी गईं।
इलाज के बाद उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। बुधवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि उन्हें लंबे समय तक सावधानी बरतनी होगी।
ठोस भोजन पर रोक, लंबा चलेगा रिकवरी पीरियड
डॉक्टरों की सलाह के अनुसार फिलहाल रामगिरी को ठोस भोजन से पूरी तरह दूर रखा गया है। उन्हें सिर्फ लिक्विड डाइट दी जा रही है। गले के जख्म को पूरी तरह भरने में वक्त लगेगा। नियमित फॉलोअप और इलाज जरूरी बताया गया है।
रामगिरी अब घर लौट आए हैं, लेकिन उनके चेहरे पर वह डर साफ झलकता है, जो मौत को बेहद करीब से देखकर आता है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक पतला सा धागा उनकी जान लेने वाला बन सकता है।
प्रतिबंध के बावजूद क्यों बिक रहा है चाइनीज मांझा
यह हादसा एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि जब चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध है, तो फिर यह खुलेआम कैसे बिक रहा है। न सिर्फ त्योहारों के समय, बल्कि आम दिनों में भी यह बाजारों में आसानी से मिल जाता है।
चाइनीज मांझा सिर्फ पतंगबाजों के लिए नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति के लिए खतरा है। बाइक सवार, पैदल यात्री, बच्चे और यहां तक कि पक्षी भी इसके शिकार हो चुके हैं।
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे, फिर भी नहीं ली गई सीख
छिंदवाड़ा ही नहीं, प्रदेश के कई हिस्सों में चाइनीज मांझे से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। कहीं किसी की उंगली कट गई, कहीं किसी की गर्दन। बावजूद इसके न तो बिक्री पर सख्ती दिखाई देती है और न ही लोगों में जागरूकता।
रामगिरी का मामला इसलिए और डरावना है क्योंकि इसमें साफ दिखता है कि कैसे एक आम इंसान, जो अपनी मेहनत से परिवार चला रहा है, सिस्टम की लापरवाही का शिकार बन गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रामगिरी गोस्वामी का परिवार पूरी तरह उनकी आमदनी पर निर्भर है। ज्वेलरी बेचकर वे जैसे-तैसे घर चला रहे थे। इस हादसे के बाद कुछ समय तक काम करना उनके लिए संभव नहीं होगा। इलाज का खर्च, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें परिवार पर अतिरिक्त बोझ बन गई हैं।
उनकी पत्नी का कहना है कि अगर उस दिन उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो आज हालात कुछ और ही होते।
समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि चेतावनी है। जब तक चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री पर सख्ती नहीं होगी और लोग खुद सतर्क नहीं होंगे, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
रामगिरी की जान बच गई, लेकिन यह सवाल हर किसी के मन में है कि क्या अगली बार भी किस्मत इतनी मेहरबान होगी।
निष्कर्ष
छिंदवाड़ा की यह घटना यह साबित करती है कि चाइनीज मांझा सिर्फ एक पतंग का धागा नहीं, बल्कि चलती-फिरती मौत है। एक पल की लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है। जरूरत है कि इस खतरे को गंभीरता से लिया जाए, ताकि कोई और रामगिरी गोस्वामी मौत के मुंह तक पहुंचने को मजबूर न हो।
