भारत में स्वच्छता की दिशा में एक नई कहानी लिखी जा रही है, और इस कहानी की शुरुआत हुई है मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से। जहां पहले स्कूलों, पंचायत भवनों और अस्पतालों के टॉयलेट कुछ ही दिनों में गंदगी से भर जाते थे, वहीं अब यह जिले का मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है।
छिंदवाड़ा प्रशासन की यह अनोखी योजना — ‘वॉश ऑन व्हील’ (Wash on Wheel) — अब केंद्र सरकार के सहयोग से पूरे भारत में लागू होने जा रही है। इसका उद्देश्य है, सरकारी टॉयलेट्स की सफाई, रखरखाव और उपयोगिता को स्थायी बनाना।

समस्या जो हर गांव में थी: बने टॉयलेट, पर रखरखाव नहीं
भारत के ग्रामीण इलाकों में वर्षों से एक ही समस्या देखी जा रही थी — सरकारी संस्थाओं के शौचालय बन तो जाते थे, लेकिन कुछ ही दिनों में सफाई न होने से वे दुर्गंध और गंदगी के अड्डे बन जाते थे।
लोगों ने इन शौचालयों का उपयोग बंद कर दिया, जिससे करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाएं बेअसर हो गईं। छिंदवाड़ा प्रशासन ने इस समस्या को “नीतिगत प्रयोग” के रूप में देखा और ठोस समाधान निकाला — एक ऐसी मोबाइल यूनिट जो खुद शौचालयों तक जाकर सफाई का काम करे। यहीं से शुरू हुआ “वॉश ऑन व्हील” का सफर।
‘वॉश ऑन व्हील’ क्या है?
“वॉश ऑन व्हील” एक मोबाइल सफाई सेवा प्रणाली है जिसमें प्रशिक्षित “स्वच्छता दूत” सफाई उपकरणों से लैस वाहन के साथ गांव-गांव जाकर सरकारी टॉयलेट्स की सफाई करते हैं। इसमें उच्च-प्रेशर वॉशिंग मशीन, बायो-क्लीनिंग सॉल्यूशन, सैनिटाइज़र, और डियोडराइज़र जैसी आधुनिक सुविधाएं होती हैं। हर गांव में यह टीम तय समय पर पहुंचती है और टॉयलेट्स को पूर्ण रूप से साफ़ व डिसइंफेक्ट करती है।
दिल्ली से आई फिक्की टीम ने किया निरीक्षण
इस प्रोजेक्ट की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की दो सदस्यीय टीम दिल्ली से विशेष रूप से छिंदवाड़ा पहुंची।
टीम ने हर्रई, अमरवाड़ा, जुन्नारदेव और परासिया ब्लॉक्स में जाकर इस योजना के जमीनी असर को देखा। उन्होंने स्थानीय स्वच्छता दूतों, पंचायत अधिकारियों और ग्रामीणों से बातचीत की। टीम के सदस्य हुसैन रंगवाला, जो कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत इंडिया सेनीटेशन कोएलिशन (ISC) के सीनियर वॉश स्पेशलिस्ट हैं, ने कहा:
“छिंदवाड़ा मॉडल एक ऐसा समाधान है जो न केवल स्वच्छता को सुधारता है, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार भी देता है। इसे अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की दिशा में काम चल रहा है।”
राज्य से राष्ट्र तक: मध्यप्रदेश से शुरू, अब पूरे देश में लागू
1 नवंबर 2025 से मध्यप्रदेश के सभी जिलों में ‘वॉश ऑन व्हील’ लागू कर दिया गया है। यह मॉडल इतना सफल रहा कि केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय नीति के तहत देशभर में लागू करने का निर्णय लिया है। जल शक्ति मंत्रालय और फिक्की के संयुक्त सहयोग से अब यह स्कीम अन्य राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू की जाएगी।
कैसे करता है यह मॉडल काम
- जिला पंचायत द्वारा चयनित स्वच्छता दूतों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
- उन्हें “वॉश ऑन व्हील” वाहन और आधुनिक सफाई उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
- हर पंचायत के लिए साप्ताहिक शेड्यूल तय किया जाता है।
- सफाई के बाद दूत ऑनलाइन रिपोर्ट और फोटो अपलोड करते हैं।
- जिला स्तर पर डेटा की निगरानी होती है।
इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति विश्वास और आदतें भी बनी हैं।
स्वच्छता दूतों की नई पहचान और आय में वृद्धि
दिल्ली से आई टीम ने जब स्वच्छता दूतों की आय और अनुभव के बारे में पूछा तो सामने बहुत प्रेरणादायक बातें आईं। पहले गांवों के कई युवा मजदूरी करते थे, मुश्किल से 5–6 हजार रुपये महीना कमा पाते थे। अब वही युवा ‘वॉश ऑन व्हील’ टीम में शामिल होकर 20 से 30 हजार रुपये महीने तक कमा रहे हैं। इसके साथ ही समाज में उनकी नई पहचान बनी है — लोग अब उन्हें ‘स्वच्छता के प्रहरी’ कहकर सम्मान देते हैं।
बदलाव जो स्कूलों तक पहुंचा
स्कूलों में टॉयलेट की गंदगी एक बड़ी समस्या थी। छात्राएं अक्सर साफ टॉयलेट न होने के कारण स्कूल आना छोड़ देती थीं।
लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद स्कूलों के टॉयलेट्स नियमित रूप से साफ रखे जा रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि लड़कियों की उपस्थिति 30% तक बढ़ गई है। इससे शिक्षा पर भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का अनुभव: “अब बदबू नहीं, गर्व महसूस होता है”
घोड़ाबड़ी खुर्द गांव के निवासी कहते हैं —
“पहले पंचायत का शौचालय देखना भी मुश्किल था। अब लोग खुशी से इस्तेमाल करते हैं, वहां बदबू नहीं आती, बल्कि साफ-सफाई देखकर गर्व होता है।”
गांव की महिलाएं कहती हैं कि इस योजना ने न केवल सफाई की व्यवस्था बदली, बल्कि स्वाभिमान की भावना भी लौटाई है।
छिंदवाड़ा को मिला राष्ट्रीय सम्मान
सितंबर 2025 में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में छिंदवाड़ा को इंडिया सेनीटेशन कोएलिशन फिक्की राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार “सतत रख-रखाव और सामुदायिक प्रबंधन” श्रेणी में मिला। यह पहली बार हुआ कि किसी जिले को राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान मिला। पुरस्कार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अग्रिम कुमार ने ग्रहण किया।
स्वच्छता और रोजगार दोनों का संगम
‘वॉश ऑन व्हील’ मॉडल केवल सफाई तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship) का बेहतरीन उदाहरण है। स्वच्छता दूतों को पंचायतों से मानदेय, CSR कंपनियों से सहयोग और स्थानीय नागरिकों से प्रोत्साहन मिलता है। यानी यह मॉडल आत्मनिर्भरता और सामुदायिक भागीदारी दोनों को जोड़ता है।
अब राष्ट्रीय स्तर पर क्या होगा?
फिक्की और जल शक्ति मंत्रालय इस मॉडल को लेकर देशभर के जिलों के साथ कार्यशालाएं आयोजित करने जा रहे हैं। उद्देश्य है कि हर राज्य अपने यहां की भौगोलिक स्थिति और जरूरतों के अनुसार इसे अपनाए। आगामी वर्ष 2026 तक यह योजना 100 से अधिक जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हो जाएगी।
निष्कर्ष
छिंदवाड़ा की “वॉश ऑन व्हील” पहल केवल सफाई की कहानी नहीं है, यह जिम्मेदारी, नवाचार और सामुदायिक एकता का प्रतीक है।
इसने दिखाया है कि अगर इच्छा और प्रबंधन सही दिशा में हो, तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है। यह केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत के स्वच्छ भविष्य की नींव है।
