उत्तर भारत में सर्दी के साथ लौटे घने कोहरे ने एक बार फिर रेल यातायात की रफ्तार थाम दी है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दृश्यता बेहद कम होने के कारण लगातार दूसरे दिन ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मंगलवार को दिल्ली रूट से भोपाल आने वाली कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से अपने गंतव्य पर पहुंचीं। कुछ ट्रेनों की देरी सात घंटे तक दर्ज की गई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रेलवे द्वारा लगाए गए एंटी फॉग डिवाइस भी इस बार कोहरे के आगे बेअसर साबित हुए। सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की गति सीमित रखी गई, जिससे समय सारिणी पूरी तरह चरमरा गई। स्टेशन प्लेटफॉर्म पर यात्री घंटों इंतजार करते नजर आए और कई परिवारों की यात्रा योजनाएं अस्त-व्यस्त हो गईं।
उत्तर भारत में मौसम का बदला मिजाज
दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में घना कोहरा और ठंडी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है। सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम रहने के कारण सड़क और रेल दोनों यातायात पर असर पड़ा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर दृश्यता 30 से 50 मीटर तक सिमट गई, जो ट्रेन संचालन के लिए बेहद जोखिम भरी स्थिति मानी जाती है।
इस मौसम का सबसे अधिक असर लंबी दूरी की ट्रेनों पर देखने को मिला। दिल्ली से भोपाल, मुंबई, चेन्नई और दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों को कई बार रास्ते में रोका गया या बेहद धीमी गति से चलाया गया।
दिल्ली रूट से आने वाली ट्रेनों की हालत
दिल्ली से भोपाल आने वाली कई प्रमुख ट्रेनें निर्धारित समय से काफी देरी से पहुंचीं। कुछ ट्रेनें तीन से चार घंटे लेट रहीं, जबकि कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों की देरी छह से सात घंटे तक पहुंच गई। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कोहरे के कारण न केवल गति सीमित करनी पड़ी, बल्कि कई स्टेशनों पर सिग्नलिंग में भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
भोपाल स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ देखने को मिली। कई यात्री रात भर सफर में फंसे रहे और सुबह स्टेशन पर पहुंच पाए। प्लेटफॉर्म पर बैठे यात्री अपने मोबाइल फोन पर ट्रेन स्टेटस चेक करते नजर आए।
एंटी फॉग डिवाइस पर उठे सवाल
रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में कोहरे से निपटने के लिए एंटी फॉग डिवाइस का इस्तेमाल शुरू किया था। इन उपकरणों का उद्देश्य लोको पायलट को कम दृश्यता में भी सिग्नल और ट्रैक देखने में मदद करना है। हालांकि इस बार घने कोहरे के सामने यह तकनीक भी प्रभावी साबित नहीं हो पाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक घना कोहरा और नमी के कारण एंटी फॉग डिवाइस की क्षमता सीमित हो जाती है। ऐसे हालात में रेलवे को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ते हैं, जिसमें ट्रेनों की गति कम करना सबसे प्रमुख कदम होता है।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी
ट्रेनों की देरी का सबसे ज्यादा असर यात्रियों पर पड़ा। कई यात्रियों को आगे की कनेक्टिंग ट्रेनें और बसें छूट गईं। कुछ यात्रियों को होटल में रुकने की मजबूरी भी झेलनी पड़ी। भोपाल स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि उन्हें यात्रा के दौरान किसी तरह की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे तनाव और बढ़ गया।
परिवारों के साथ यात्रा कर रहे बुजुर्ग और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत हुई। ठंड और लंबा इंतजार उनकी परेशानी को और बढ़ाता रहा। स्टेशन पर चाय, पानी और खाने की दुकानों पर भीड़ देखी गई।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और कोहरे जैसी परिस्थितियों में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, कोहरे के दौरान ट्रेनों की गति नियंत्रित करना और अतिरिक्त निगरानी रखना अनिवार्य होता है।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें और संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा की योजना बनाएं।
लंबी दूरी की ट्रेनों पर ज्यादा असर क्यों
लंबी दूरी की ट्रेनें कई राज्यों से होकर गुजरती हैं, जहां अलग-अलग स्थानों पर मौसम की स्थिति अलग होती है। उत्तर भारत में कोहरा सबसे अधिक प्रभाव डालता है, जिससे इन ट्रेनों की पूरी समय सारिणी प्रभावित हो जाती है। एक बार देरी होने पर उसे पूरे रूट पर संभालना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के महीनों में यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन इस बार कोहरे की तीव्रता अधिक होने के कारण असर भी ज्यादा दिखा।
भविष्य में समाधान की जरूरत
रेल यातायात को कोहरे से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए तकनीकी सुधारों की जरूरत महसूस की जा रही है। बेहतर विजन सिस्टम, उन्नत सिग्नलिंग और मौसम पूर्वानुमान आधारित संचालन जैसी व्यवस्थाओं पर काम करना जरूरी है।
इसके साथ ही यात्रियों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी, ताकि वे अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकें।
आम जनजीवन पर असर
कोहरे के कारण केवल रेल यातायात ही नहीं, बल्कि सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। स्कूल जाने वाले बच्चों, ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और व्यापारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रेल यात्रा में देरी का असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा, क्योंकि कई महत्वपूर्ण बैठकें और डिलीवरी समय पर नहीं हो सकीं।
