दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क को लेकर जो खुलासे किए हैं, उन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया है। इनमें सबसे बड़ा नाम सामने आया है — फरीदाबाद की डॉ. शाहीन का, जो पेशे से एक डॉक्टर बताई जा रही हैं लेकिन उनके तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े मिले हैं। जांच में पता चला है कि डॉ. शाहीन को खुद मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर ने जैश के “महिला विंग” की कमान सौंपी थी।

डॉक्टर जो हीलर नहीं, हेड ऑफ टेरर नेटवर्क निकलीं
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, डॉ. शाहीन का असली नाम शाहीन अफ़ज़ल है। फरीदाबाद में एक निजी क्लिनिक में काम करने वाली यह महिला दिखने में सामान्य डॉक्टर की तरह थी, लेकिन पर्दे के पीछे वह आतंक के नए नेटवर्क की ‘ब्रेन’ थी। एनआईए और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने पिछले हफ्ते उनके घर और क्लिनिक पर छापा मारा, जहां से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सैटेलाइट फोन और एन्क्रिप्टेड चैट लॉग बरामद किए गए। इन चैट्स में ‘सादिया’, ‘अम्मा’, और ‘Z-Wing’ जैसे कोडवर्ड पाए गए, जिनके तार पाकिस्तान के बहावलपुर में बैठे जैश के कमांडरों से मिलते हैं।
डिजिटल जिहाद का नेटवर्क
एजेंसियों के मुताबिक, शाहीन ने ‘डिजिटल जिहाद’ के नाम पर ऑनलाइन ग्रुप बनाए थे। इन ग्रुप्स में देशभर की युवतियों को शामिल किया जा रहा था। उद्देश्य था — महिलाओं को कट्टरपंथ के रास्ते पर लाकर उन्हें ‘स्लीपर एजेंट’ के रूप में तैयार करना। इन ग्रुप्स में डॉक्टर, नर्स, छात्राएं और कुछ आईटी सेक्टर से जुड़ी महिलाएं थीं। शाहीन ने उनके लिए विशेष टेलीग्राम चैनल, वर्चुअल ट्रेनिंग सेशन और “अल्लाह की नायिकाएं” नामक डिजिटल मॉड्यूल तैयार किया था।
सादिया अजहर का दिमागी खेल
सूत्रों के अनुसार, सादिया अजहर, जो जैश सरगना मसूद अजहर की बहन हैं, ने शाहीन से ऑनलाइन संपर्क किया था। पाकिस्तान के बहावलपुर से संचालित एक एन्क्रिप्टेड सर्वर के जरिए दोनों में कई बार बातचीत हुई। सादिया ने शाहीन को आदेश दिया था कि वह भारत में महिला समर्थक तंत्र को खड़ा करे और उन्हें ‘सामाजिक सेवा’ और ‘धार्मिक शिक्षा’ के नाम पर संगठित करे। इस पूरे अभियान का कोडनेम रखा गया था — “ऑपरेशन नूर”।
दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके में जांच एजेंसियों को कुछ सुराग मिले थे — एक मोबाइल सिम, जो फरीदाबाद से खरीदी गई थी और जिसका उपयोग डॉ. शाहीन के क्लिनिक के आसपास से हुआ था। जांच में यह भी सामने आया कि धमाके से दो दिन पहले शाहीन ने अपने टेलीग्राम ग्रुप में “अंधकार से रोशनी की ओर” नामक संदेश पोस्ट किया था, जो अब कोडेड सिग्नल माना जा रहा है।
एजेंसियों की कार्रवाई और पूछताछ
एनआईए और इंटेलिजेंस ब्यूरो की संयुक्त टीम ने शाहीन से पूछताछ में कई अहम जानकारी प्राप्त की हैं। उन्होंने कबूल किया कि उन्हें पाकिस्तान से हर महीने फंड मिलता था, जो क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भेजा जाता था। सुरक्षा एजेंसियों ने कम से कम 15 डिजिटल अकाउंट्स, 3 विदेशी वॉलेट्स, और एक NGO ‘सेवा-ए-इंसानियत’ को फंडिंग चैनल के रूप में चिन्हित किया है।
महिला विंग का मिशन
शाहीन का उद्देश्य था महिलाओं को “संवेदनशील नायिका” की भूमिका में लाना। इसके तहत महिलाएं समाजसेवा, मेडिकल कैंप और ऑनलाइन काउंसलिंग के नाम पर लोगों तक पहुंचतीं। फिर धीरे-धीरे उन्हें विचारधारात्मक रूप से प्रभावित किया जाता। इस नेटवर्क का दूसरा चरण था — भारत में अस्थिरता फैलाना, धार्मिक नफरत भड़काना और संवेदनशील इलाकों में हिंसा भड़काने के लिए ‘मनोवैज्ञानिक टेरर कैंपेन’ चलाना।
फरीदाबाद नेटवर्क का विस्तार
फरीदाबाद से लेकर दिल्ली, मेरठ, और लखनऊ तक इस नेटवर्क के सक्रिय मॉड्यूल मिले हैं। शाहीन ने अपने क्लिनिक में एक “हेल्थ काउंसलिंग” सेंटर चलाया था, जहां महिलाओं को “मानसिक शांति” और “इस्लामिक मूल्यों की शिक्षा” के नाम पर कट्टरपंथी विचार दिए जाते थे। एनआईए का दावा है कि शाहीन ने 2023 से अब तक कम से कम 38 महिलाओं को प्रभावित किया, जिनमें से कुछ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संपर्क में थीं।
पाकिस्तानी हैंडलर्स से गहरा रिश्ता
शाहीन के मोबाइल से प्राप्त डेटा में ISI से जुड़े तीन फोन नंबर, और “सादिया बहन” नाम से सेव किया गया एक व्हाट्सएप कॉन्टैक्ट मिला है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या शाहीन सीधे बहावलपुर के जैश मुख्यालय से निर्देश ले रही थीं या किसी मध्यस्थ के माध्यम से।
फंडिंग और विदेशी लिंक
एनआईए सूत्रों के अनुसार, शाहीन के खातों में दुबई, मस्कट और दोहा से आने वाले ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड मिले हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शाहीन को “महिला विंग” को चलाने के लिए हर तीन महीने में 25,000 अमेरिकी डॉलर भेजे जाते थे। फंड्स का उपयोग सोशल मीडिया कैंपेन, ऑनलाइन रिक्रूटमेंट, और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में किया जाता था।
स्लीपर सेल की नई रणनीति
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद अब ‘पुरुष जिहादियों’ के साथ-साथ महिलाओं को भी सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने की रणनीति अपना रहा है। डॉ. शाहीन का मामला इस नई रणनीति का ताजा उदाहरण है। आतंकियों का मानना है कि महिलाएं संदेह के घेरे में कम आती हैं, इसलिए वे अधिक प्रभावी ‘कन्वेयर्स’ बन सकती हैं।
अदालत में पेशी और कानूनी पहलू
शाहीन को सोमवार को दिल्ली की एनआईए कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सरकारी वकील ने बताया कि शाहीन के खिलाफ यूएपीए (UAPA) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आतंकवाद की ‘नई परत’
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला भारत में आतंकवाद की “नई परत” को उजागर करता है — शिक्षित, स्मार्ट और सामाजिक रूप से स्थापित चेहरों के पीछे छिपा कट्टर नेटवर्क। पूर्व डीजीपी अजय सक्सेना ने कहा — “अब आतंकवाद सिर्फ बंदूक या बम से नहीं, बल्कि दिमाग और डेटा से लड़ा जा रहा है। शाहीन इसका प्रतीक है।”
आगे की कार्रवाई
एजेंसियां अब उन 28 नंबरों को ट्रैक कर रही हैं जिनसे शाहीन ने पिछले छह महीनों में बात की थी। साइबर सेल ने उनके क्लाउड अकाउंट से 400GB डेटा रिकवर किया है, जिसमें एन्क्रिप्टेड डॉक्युमेंट्स और वीडियो शामिल हैं। एनआईए ने इंटरपोल से भी संपर्क साधा है ताकि सादिया अजहर और उसके सहयोगियों की लोकेशन ट्रेस की जा सके।
निष्कर्ष
फरीदाबाद की डॉ. शाहीन का मामला यह साबित करता है कि आतंक अब सीमाओं में नहीं बंधा। यह समाज के अंदर से, और कभी-कभी सबसे अप्रत्याशित जगहों से जन्म ले रहा है। जहां एक ओर शाहीन जैसी महिलाएं आतंक की विचारधारा को फैलाने का जरिया बन रही हैं, वहीं यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी भी है कि आतंकवाद का चेहरा बदल रहा है — अब यह मुस्कान के पीछे छिपा जहर बन चुका है।
