उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। वर्ष 2021 में जिसकी आधारशिला रखी गई थी, वह लगभग 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार बताया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में इसका उद्घाटन कर इसे आम जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। सरकार की योजना है कि नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से इस पर वाहनों की नियमित आवाजाही और टोल वसूली शुरू कर दी जाए।

मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क
यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास बिजौली गांव से शुरू होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जूड़ापुर डांडू गांव के पास समाप्त होगा। इस तरह यह राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से के बीच सीधा और सुगम मार्ग उपलब्ध कराएगा। अभी मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लगभग 12 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग 6 से 7 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क पर दबाव भी घटेगा।
12 जिलों और 518 गांवों को मिलेगा लाभ
यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों से होकर गुजरेगा। इन जिलों के लगभग 518 गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा। इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान होगी, छोटे उद्योगों को बाजार तक पहुंचने का बेहतर अवसर मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
36,200 करोड़ की लागत और टोल वसूली की तैयारी
इस विशाल परियोजना पर करीब 36,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार की मंशा है कि टोल वसूली के जरिए इस निवेश की भरपाई की जाए। टोल दरों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कार के लिए लगभग 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की जा सकती है। इस हिसाब से 594 किलोमीटर की दूरी के लिए एक तरफ का टोल करीब 1,515 रुपये हो सकता है। छोटे वाणिज्यिक वाहनों के लिए लगभग 2,405 रुपये, बस और ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए करीब 4,840 रुपये, भारी निर्माण वाहनों के लिए लगभग 7,455 रुपये और सात एक्सल से अधिक वाले बड़े वाहनों के लिए करीब 9,535 रुपये एकतरफा टोल का अनुमान है।
ढांचागत मजबूती और आधुनिक सुविधाएं
एक्सप्रेसवे के निर्माण में कुल 1,498 से अधिक संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और अन्य तकनीकी ढांचे शामिल हैं। शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जहां आपातकालीन स्थिति में लड़ाकू या अन्य विमान उतर सकेंगे। यह सुविधा इस एक्सप्रेसवे को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
टोल मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल भी पूरा किया जा चुका है। विशेषज्ञों द्वारा वाहन गति, सड़क की गुणवत्ता और ड्राइविंग अनुभव का परीक्षण किया जा रहा है ताकि उद्घाटन के बाद यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों का नया कॉरिडोर बन सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और उद्योगों को तेजी से माल परिवहन की सुविधा मिलेगी। इससे नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने की संभावना है। पर्यटन क्षेत्र को भी इससे लाभ मिल सकता है, क्योंकि प्रयागराज और आसपास के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
नए वित्त वर्ष से नई रफ्तार
सरकार की कोशिश है कि 1 अप्रैल 2026 से इस एक्सप्रेसवे पर नियमित यातायात शुरू हो जाए। इससे न केवल राजस्व प्राप्ति शुरू होगी, बल्कि राज्य की विकास गति को भी नया आयाम मिलेगा। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई नींव अब एक साकार रूप ले चुकी है और यह परियोजना उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और ग्रामीण विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह मार्ग उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का प्रतीक बनने की ओर बढ़ रहा है।
