मध्यप्रदेश के हरदा जिले ने 24 जनवरी 2026 को खेलों के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। आमतौर पर कृषि और शांत जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की फीडर रेटेड रैपिड शतरंज प्रतियोगिता की मेजबानी कर यह साबित कर दिया कि बौद्धिक खेलों में भी यह क्षेत्र किसी से पीछे नहीं है। हरदा डिग्री कॉलेज परिसर में आयोजित यह प्रतियोगिता न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय बन गई।

इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों के साथ-साथ फ्रांस और श्रीलंका से आए अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 350 से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को अभूतपूर्व बना दिया।
पहली फीडर रेटेड इंटरनेशनल प्रतियोगिता का महत्व
यह प्रतियोगिता इसलिए भी विशेष रही क्योंकि यह हरदा की पहली फीडर रेटेड इंटरनेशनल रैपिड चेस प्रतियोगिता थी। फीडर रेटिंग का अर्थ है कि इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय शतरंज रेटिंग प्रणाली में जोड़ा गया। इससे युवा और उभरते खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर मिला।
शतरंज विशेषज्ञों के अनुसार छोटे शहरों में इस तरह की रेटेड प्रतियोगिताओं का आयोजन खेल के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे प्रतिभाएं केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहतीं और ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का मंच मिलता है।
हरदा डिग्री कॉलेज परिसर बना शतरंज का केंद्र
हरदा डिग्री कॉलेज का विशाल परिसर इस आयोजन के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। शांत वातावरण, सुव्यवस्थित हॉल और तकनीकी व्यवस्थाओं ने प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया। हर टेबल पर शतरंज की बिसात सजी थी और घड़ियों की टिक-टिक के बीच खिलाड़ी अपनी रणनीतियों में डूबे हुए नजर आ रहे थे।
सुबह से शाम तक चले मुकाबलों में हर चाल के साथ रोमांच बढ़ता गया। दर्शकों के लिए भी यह एक अनोखा अनुभव था, जहां वे देश-विदेश के खिलाड़ियों को एक ही मंच पर खेलते हुए देख पा रहे थे।
भारत, फ्रांस और श्रीलंका के खिलाड़ियों की मौजूदगी
इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों की संख्या सबसे अधिक रही, जिनमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आए खिलाड़ी शामिल थे। इसके अलावा फ्रांस और श्रीलंका से आए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता को वैश्विक स्वरूप दिया।
विदेशी खिलाड़ियों ने भारतीय प्रतिभाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि छोटे शहरों में शतरंज के प्रति बढ़ता उत्साह यह दर्शाता है कि भारत का भविष्य इस खेल में बेहद उज्ज्वल है। वहीं भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से सीखने और खुद को परखने का बेहतरीन मौका था।
रैपिड शतरंज ने बढ़ाया रोमांच
यह प्रतियोगिता रैपिड शतरंज प्रारूप में आयोजित की गई, जिसमें खिलाड़ियों को सीमित समय में अपनी चालें चलनी होती हैं। इस फॉर्मेट में न केवल रणनीतिक सोच बल्कि त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी परखी जाती है।
हर मुकाबले में समय के दबाव ने खेल को और भी रोचक बना दिया। कई बार अंतिम क्षणों में पलटते हुए मुकाबले दर्शकों के लिए यादगार बन गए। युवा खिलाड़ियों ने अनुभवी शतरंज खिलाड़ियों के खिलाफ बेखौफ खेल दिखाया, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और ऊंचा हो गया।
आयोजन के पीछे प्रशासनिक सहयोग
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के सफल आयोजन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कलेक्टर हरदा के मार्गदर्शन में इस आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। स्थानीय खेल संगठनों और शतरंज संघों ने भी आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।
आयोजकों का कहना है कि प्रशासनिक सहयोग के बिना इतने बड़े स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं होता। यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि जब प्रशासन और खेल संगठन मिलकर काम करते हैं, तो छोटे जिले भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
हरदा में आयोजित इस प्रतियोगिता ने जिले के युवाओं में शतरंज के प्रति नई ऊर्जा भर दी है। बड़ी संख्या में स्कूली और कॉलेज के छात्र दर्शक के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने न केवल मुकाबले देखे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से बातचीत कर खेल की बारीकियों को भी समझा।
स्थानीय कोचों का मानना है कि इस प्रतियोगिता के बाद हरदा और आसपास के क्षेत्रों में शतरंज सीखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे भविष्य में और भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने आ सकते हैं।
छोटे शहरों में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की नई परंपरा
अब तक अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताएं बड़े शहरों तक सीमित मानी जाती थीं। लेकिन हरदा में इस आयोजन ने यह धारणा बदल दी है। यह दिखाता है कि यदि इच्छाशक्ति और सही योजना हो, तो किसी भी शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन संभव हैं।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होता है।
भविष्य की संभावनाएं और उम्मीदें
हरदा में पहली अंतरराष्ट्रीय रैपिड शतरंज प्रतियोगिता की सफलता ने भविष्य के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। आयोजकों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में इस प्रतियोगिता को और बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है, जिसमें और अधिक देशों के खिलाड़ियों को आमंत्रित किया जाएगा।
यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो हरदा आने वाले समय में शतरंज के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
