स्पेन की एविएशन इंडस्ट्री में 7 जनवरी 1972 की तारीख हमेशा एक काले अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी। उस दिन इबेरिया एयरलाइंस की फ्लाइट 602, जो वालेंसिया से इबीसा जा रही थी, अपने मिशन में कभी न भूलने वाले हादसे में तब्दील हो गई। इस उड़ान में 98 पैसेंजर और 6 क्रू सदस्य सवार थे। फ्लाइट एयरपोर्ट पर उतरने से पहले ही नियंत्रण खो बैठी और माउंट अतलायासा की पहाड़ी से टकरा गई। इस हादसे में हवाई यात्रा के 104 लोगों की जान चली गई, जिसमें यात्री और क्रू सदस्य दोनों शामिल थे।

फ्लाइट 602 के कैप्टन 37 वर्षीय जोसे लुइस बैलेस्टर सेपुल्वेदा थे। उनके पास लगभग 7,000 घंटे का उड़ान अनुभव था और उन्हें उस समय के सबसे आधुनिक विमानों को उड़ाने का अनुभव भी था। उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर जीसस मोंतेसिनोस सांचेज और फ्लाइट इंजीनियर विसेंटे रोड्रीगेज मेसा मौजूद थे। फ्लाइट में लगे दो अत्यंत शक्तिशाली रॉल्स रॉयस इंजन इसे उस समय का सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट बनाते थे।
इबीसा एयरपोर्ट के पास हुई हादसे की शुरुआत
7 जनवरी की दोपहर लगभग 12:15 बजे कैप्टन जोसे लुइस ने इबीसा एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया। उन्होंने 5,500 फीट की ऊंचाई तक प्लेन को नीचे लाने की अनुमति मांगी। इसके बाद कुछ सामान्य बातचीत हुई। कैप्टन ने ATC से पहले फुटबॉल मैच के नतीजों के बारे में पूछा और फिर मजाकिया अंदाज में कहा, “मेरी बीयर रेडी रखना।”
यह बातचीत शुरुआत थी उस हादसे की जिसकी गंभीरता बाद में पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दी। पायलट का ध्यान एटीसी से बातचीत में होने के कारण वह विमान की ऊंचाई पर निगरानी नहीं रख सके। धीरे-धीरे फ्लाइट निर्धारित ऊंचाई से नीचे उतरने लगी।
मानवीय चूक और हादसे का कारण
जांच रिपोर्टों के अनुसार, फ्लाइट 602 के हादसे की मुख्य वजह पायलट द्वारा न्यूनतम सुरक्षित ऊंचाई का ध्यान न रखना और उड़ान के दौरान व्यस्त बातचीत में लग जाना था। पायलट के हल्के-फुल्के मजाक और फुटबॉल की चर्चा के दौरान विमान की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे विमान तेजी से पहाड़ी की ओर बढ़ता गया।
फ्लाइट ने माउंट अतलायासा की ऊंचाई से कुछ फीट नीचे टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान तुरंत मलवे में तब्दील हो गया। इस हादसे में 98 यात्रियों और 6 क्रू सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। बचाव का कोई प्रयास संभव नहीं था क्योंकि विमान पहाड़ी की चोटी के बेहद करीब था।
फ्लाइट की तकनीकी विशेषताएं और चालक दल
इबेरिया एयरलाइंस फ्लाइट 602 उस समय के सबसे आधुनिक विमानों में से एक थी। दो शक्तिशाली रॉल्स रॉयस इंजन और अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम के बावजूद मानवीय गलती के कारण यह विमान हादसे का शिकार हुआ। कैप्टन जोसे लुइस बैलेस्टर सेपुल्वेदा, फर्स्ट ऑफिसर जीसस मोंतेसिनोस सांचेज और फ्लाइट इंजीनियर विसेंटे रोड्रीगेज मेसा पूरी तैयारी के बावजूद इस त्रासदी से बच नहीं पाए।
फ्लाइट में मौजूद अधिकांश यात्री छुट्टियों से लौट रहे थे। उनके बीच परिवार, दोस्तों और जोड़े शामिल थे। इस हादसे ने न केवल स्पेन के एविएशन उद्योग को झकझोर कर रख दिया बल्कि पूरे यूरोप में हवाई सुरक्षा और मानवीय त्रुटियों की समीक्षा की आवश्यकता को भी उजागर किया।
हादसे के बाद जांच और निष्कर्ष
जांचकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि फ्लाइट के दुर्घटनाग्रस्त होने का मुख्य कारण मानवीय चूक थी। पायलट ने न्यूनतम सुरक्षित ऊंचाई को बनाए रखने में असफलता दिखाई और उड़ान के दौरान व्यस्त बातचीत के कारण विमान का नियंत्रण खो गया। तकनीकी उपकरण सही थे, विमान पूरी तरह उड़ान के लिए सक्षम था, लेकिन मानव त्रुटि ने सब कुछ नष्ट कर दिया।
इस हादसे के बाद स्पेन और अन्य देशों ने विमानन सुरक्षा नियमों को और कड़ा किया। पायलटों को प्रशिक्षण दिया गया कि उड़ान के दौरान किसी भी गैर-जरूरी बातचीत से बचना चाहिए और न्यूनतम सुरक्षित ऊंचाई के पालन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विमानन सुरक्षा के सबक
फ्लाइट 602 की त्रासदी से यह साबित हुआ कि विमान तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो, मानवीय त्रुटियां हमेशा खतरे की घंटी हो सकती हैं। इस हादसे ने एयरलाइन इंडस्ट्री में सतर्कता और सुरक्षा नियमों की अहमियत को दुनिया के सामने रखा।
