संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का ढाँचा अब पुराना हो चुका है, और इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक तेज़ी से महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित IBSA शिखर सम्मेलन से एक शक्तिशाली संदेश दुनिया को दिया —
“यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड बर्दाश्त नहीं।” — प्रधानमंत्री मोदी

भारत लंबे समय से UNSC में एक स्थायी सीट की मांग कर रहा है। दुनिया आज जान रही है कि ग्लोबल साउथ की आवाज़ बने बिना 21वीं सदी की भू-राजनीति अधूरी है — और भारत उस आवाज़ का सबसे बड़ा प्रतिनिधि है।
लेकिन हर कहानी की तरह यहां भी दो पक्ष हैं —
✔ समर्थन करने वाले राष्ट्र
❌ विरोध करने वाले देश
और विरोध का सबसे शोरगुल वाला नाम है — पाकिस्तान
भारत क्यों चाहता है स्थायी सीट?
सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का मतलब सिर्फ एक कुर्सी नहीं — बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरण में निर्णायक आवाज़। यहाँ से तय होते हैं —
• युद्ध और शांति के निर्णय
• आतंकवाद पर वैश्विक कार्रवाई
• प्रतिबंधों और सैन्य अभियानों के फैसले
• दुनिया की आर्थिक और सुरक्षा दिशा
भारत का सवाल स्पष्ट है:
जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है
जब भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है
जब भारत अंतरिक्ष से परमाणु शक्ति तक अग्रणी है
जब भारत 200+ शांति सैनिक मिशनों में सबसे आगे है
तो भारत को स्थायी सीट क्यों नहीं?
UNSC में अभी कौन-कौन स्थायी सदस्य हैं?
इन्हें कहा जाता है P-5 (Permanent Five)
| देश | वीटो शक्ति | युद्धोत्तर स्थिति |
|---|---|---|
| अमेरिका | ✔ | द्वितीय विश्व युद्ध विजेता |
| चीन | ✔ | विजेताओं के साथ गठजोड़ |
| रूस (पूर्व USSR) | ✔ | विजेता शक्ति |
| फ्रांस | ✔ | विजेता पक्ष |
| ब्रिटेन | ✔ | विजेता पक्ष |
यानि यह क्लब 75 वर्ष पुराना है।
और दुनिया बदल चुकी है।
भारत का दावा किन 4 देशों के साथ?
इस समूह को कहा जाता है — G-4
| देश | महत्त्व |
|---|---|
| भारत | दक्षिण एशिया और ग्लोबल साउथ का नेतृत्वकर्ता |
| जापान | आर्थिक महाशक्ति |
| जर्मनी | यूरोप की औद्योगिक ताकत |
| ब्राजील | लैटिन अमेरिका का सबसे प्रभावशाली देश |
चारों देश एक-दूसरे के दावे का समर्थन करते हैं। वे चाहते हैं कि—
- UNSC की सदस्यता 15 से बढ़ाकर 25 की जाए
- इनमें 6 नए स्थायी सदस्य शामिल हों
सबसे बड़ा विरोधी कौन? — “कॉफी क्लब”
यह समूह UNSC के विस्तार को रोकने पर तुला है। मुख्य सदस्य —
| देश | कारण |
|---|---|
| पाकिस्तान | भारत को बड़ी शक्ति बनते देखना बर्दाश्त नहीं |
| इटली | यूरोप में जर्मनी की ताकत बढ़ने से डर |
| अर्जेंटीना | ब्राजील को बढ़त नहीं देना चाहता |
| दक्षिण कोरिया | जापान की प्रमुखता से असहमति |
| मेक्सिको | क्षेत्रीय शक्ति समीकरण बदलने का भय |
पाकिस्तान का तर्क बेहद कमज़ोर और भावनात्मक है —
“भारत को स्थायी सीट मिली तो कश्मीर पर क्या होगा?”
लेकिन दुनिया पाकिस्तान की बात अब गंभीरता से नहीं सुनती।
🇫🇷🇷🇺🇺🇸 कौन भारत के साथ है?
भारत को P-5 की तीन बड़ी ताकतों का समर्थन प्राप्त है:
- अमेरिका
- फ्रांस
- रूस
वहीं ब्रिटेन भी कई बार समर्थन जता चुका है। सिर्फ एक बड़ा अवरोध — चीन
चीन क्यों रोकेगा भारत का रास्ता?
| भारत की समस्या | चीन की भूमिका |
|---|---|
| पाकिस्तान आधारित आतंकवादियों पर प्रतिबंध | बार-बार तकनीकी रोक |
| सीमा विवाद | तनाव बनाए रखना चीन की रणनीति |
| जनसंख्या और शक्ति संतुलन | भारत को बराबरी पर देखना पसंद नहीं |
चीन भारत की वैश्विक आवाज़ मजबूत नहीं होने देना चाहता। वह पाकिस्तान को एक भू-राजनीतिक मोहरा बनाकर इस्तेमाल करता है।
भारत के पास क्या मजबूत आधार है?
| क्षेत्र | उपलब्धि |
|---|---|
| कूटनीति | G20 में अफ्रीकी संघ को सदस्य बनाना — ऐतिहासिक |
| अर्थव्यवस्था | दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी |
| विज्ञान-तकनीक | मंगल मिशन, चंद्रमा दक्षिण ध्रुव सफलता |
| सेना | परमाणु क्षमता + सबसे बड़ा स्वयंसेवी बल |
| जनसंख्या | युवा और सबसे बड़ी कार्यशील शक्ति |
| वैश्विक भरोसा | शांति सैनिकों में अग्रणी |
भारत सिर्फ अपनी सीट के लिए नहीं लड़ रहा — भारत दुनिया की नई आवाज़ बन रहा है।
पाकिस्तान: “आस्तीन का सांप”?
बहुत से रणनीतिक विश्लेषकों का यह कहना है कि—
“पाकिस्तान भारत के हर प्रयास को रोकने के लिए हर दरवाज़े पर जाकर रिरियाता है।”
लेकिन अब दुनिया की सोच बदल रही है —
- आतंकवाद पर पाकिस्तान की छवि बदनाम
- आर्थिक रूप से कंगाली
- आंतरिक राजनीति अस्थिर
- वैश्विक मंचों पर प्रभाव शून्य
इसलिए जब सवाल आता है — भारत बनाम पाकिस्तान
तो दुनिया भारत की तरफ देखती है।
UNSC सुधार क्यों ज़रूरी है?
- 1945 की दुनिया और 2025 की दुनिया अलग है
- तब उपनिवेशवाद था, आज वैश्विक लोकतंत्र
- तब एशिया-प्रशांत की आवाज़ नहीं थी
- तब अर्थव्यवस्था यूरोप-अमेरिका केंद्रित थी
आज वैश्विक शक्ति संतुलन पूर्व की ओर शिफ्ट हो चुका है —
- भारत
- चीन
- दक्षिण एशिया
- अफ्रीका
- लैटिन अमरीका
इन क्षेत्रों की आवाज भी निर्णायक होनी चाहिए।
आगे भारत की राह कैसी?
यह लड़ाई एक दिन की नहीं — यह विश्व व्यवस्था बदलने की लड़ाई है।
“विश्व का भविष्य भारत की भागीदारी के बिना तय नहीं होगा।”
संकेत स्पष्ट —
• भारत की दावेदारी हर दिन और मजबूत हो रही है
• पाकिस्तान की विरोध क्षमता हर दिन घट रही है
• चीन भी अनंतकाल तक रोक नहीं सकेगा
