भारतीय विमानन क्षेत्र हाल ही में एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट कैंसलेशन समस्या ने न केवल यात्रियों को परेशान किया है बल्कि इसके चलते डीजीसीए (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) पर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इंडिगो क्राइसिस के मद्देनजर डीजीसीए ने चार फ्लाइट ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर (एफओआई) पायलट्स को अचानक बर्खास्त कर दिया। इस कार्रवाई ने पूरे एविएशन क्षेत्र और मीडिया में हंगामा मचा दिया है।

11 दिसंबर की देर शाम, डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर सुनील सिंह रावत के हस्ताक्षर से एक ऑफिस ऑर्डर जारी हुआ, जिसमें चार पायलट्स को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया। इस आदेश में डिप्टी चीफ फ्लाइट ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर (एरोप्लेन) ऋषिराज चटर्जी, सीनियर फ्लाइट ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर (एरोप्लेन) सीमा झमनानी, फ्लाइट ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर (एरोप्लेन) अनिल कुमार पोखरियाल और फ्लाइट ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर (एरोप्लेन) प्रियम कौशिक शामिल थे। हालांकि, इस बर्खास्तगी के निर्णय पर विवाद बढ़ रहा है क्योंकि दावा किया जा रहा है कि इन चारों पायलट्स का इंडिगो एफडीटीएल (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) मसले से कोई लेना-देना नहीं था।
बर्खास्तगी का असली सवाल
विशेषज्ञों और एविएशन समुदाय का कहना है कि डीजीसीए की यह कार्रवाई अनुचित और बिना जांच के की गई। बर्खास्त किए गए पायलट्स में से एक अनिल पोखरियाल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्होंने एक महीने पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में उनकी बर्खास्तगी को कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना सवालों के घेरे में है। अन्य पायलट्स, जो कि कंसल्टेंट के पद पर कार्यरत थे, उनके द्वारा इंडिगो एफडीटीएल कमेटी में कोई भूमिका नहीं निभाई गई थी।
एविएशन विशेषज्ञ संजय लाजर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा कि इन चार पायलट्स को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अनिल पोखरियाल एडवांस स्टेज के कैंसर से जूझ रहे हैं और उनका एफडीटीएल से कोई लेना-देना नहीं था। बाकी दो पायलट्स का भी सीधे तौर पर इस मसले से कोई संबंध नहीं था।
राष्ट्रीय नायक और पायलट्स का प्रोफेशनल रिकॉर्ड
बर्खास्त पायलट्स में प्रियम कौशिक एक ऐसे पायलट हैं जिन्हें राष्ट्रीय हीरो माना जाता है। जून 2016 में बेंगलुरु में जेट एयरवेज के ATR विमान में आग लगने पर उन्होंने 65 यात्रियों की जान बचाई थी। इसके अलावा, उन्होंने ऑपरेशन कावेरी के तहत भारत के लिए शुरुआती उड़ानों में से एक उड़ान भरी थी। वह भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे हैं। उनकी बहादुरी और पेशेवर योगदान को हमेशा सराहा गया, लेकिन डीजीसीए ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
ऋषिराज चटर्जी, 30 से अधिक वर्षों के अनुभव वाले पायलट हैं और विस्तारा में एग्जामिनर रह चुके हैं। उन्होंने बोइंग 787 उड़ाई और एग्जीक्यूटिव स्तर पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स तैयार किए। उनकी पेशेवर साख और इंटेग्रिटी उच्चतम स्तर की रही है। सीमा झमनानी और अन्य पायलट्स भी अपने क्षेत्र में बेहद सम्मानित और अनुभवी हैं।
जांच का अभाव और विवाद
बर्खास्त किए गए पायलट्स ने बताया कि इस मामले में न तो कोई जांच की गई और न ही उनसे कोई सवाल-जवाब किया गया। उन्हें सीधे उनके पद से हटा दिया गया और वे खुद को न्यायिक प्रक्रिया से वंचित महसूस कर रहे हैं। डीजीसीए के अनुसार यह कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ राजनीति और दबाव का परिणाम है।
पायलट्स का कहना है कि उनका कार्य केवल सलाह देने तक सीमित था। किसी भी निर्णायक प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उनका एफडीटीएल कमेटी से कोई संबंध नहीं था। डीजीसीए के अधिकारी जो इंडिगो एफडीटीएल कमेटी का हिस्सा थे, वही अब जांच टीम में शामिल हैं।
सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभाव
इस बर्खास्तगी का सबसे गंभीर असर पायलट्स के व्यक्तिगत जीवन और उनके परिवार पर पड़ा है। प्रियम कौशिक के बच्चों और पत्नी पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ा है। परिवार के सदस्य डर और शर्म महसूस कर रहे हैं। एविएशन समुदाय का कहना है कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक रूप से किसी भी पायलट की छवि को धूमिल करना अनुचित और गैरजिम्मेदाराना है।
भविष्य की चुनौतियां
इस घटना ने भारतीय नागरिक उड्डयन और नियामक संस्थाओं पर विश्वास को हिला दिया है। इंडिगो जैसे बड़े एयरलाइन में फ्लाइट कैंसलेशन और पायलट्स की बर्खास्तगी ने यह सवाल खड़ा किया है कि नियामक संस्थाएं किस तरह से मामलों की जांच और निर्णय प्रक्रिया को संचालित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिक पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और नियामक प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।
