मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में ज्वेलरी कारोबारियों को निशाना बनाने की दो बड़ी घटनाएँ सामने आई हैं। एक मामले में सराफा इलाके से सात बंगाली कारीगर करीब एक करोड़ रुपये मूल्य का सोना लेकर फरार हो गए, वहीं दूसरे मामले में भंवरकुआं क्षेत्र में अंतरराज्यीय गिरोह ने पांच रानी हार बनवाने के बहाने एक ज्वेलर से 50 लाख रुपये कीमत के आभूषण झांसे में लेकर गायब कर दिए। दोनों मामलों ने शहर में ज्वेलरी कारोबारियों की सुरक्षा और भरोसे पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

सराफा में धोखाधड़ी: कारीगरों का बीसी फंड लेकर गायब होने का मामला
इंदौर पुलिस को सराफा क्षेत्र से मिली शिकायत के अनुसार, ओम विहार कॉलोनी निवासी कारीगर एवं ज्वेलरी निर्माता गणेश पुत्र निताई ने आरोप लगाया है कि उनके साथ काम करने वाले बंगाली कारीगरों ने सोने की बीसी फंड योजना के माध्यम से एकत्रित करीब एक करोड़ रुपये मूल्य का सोना लेकर रातोंरात दुकान बंद कर फरार हो गए। इस घटना के सामने आने के बाद सराफा में हड़कंप मच गया है।
कैसे रची गई साजिश
जानकारी के अनुसार सोने की बीसी एक तरह का फंड होता है जिसमें स्थानीय ज्वेलर्स और कारीगर अपनी राशि या सोना जमा करते हैं और महीने के हिसाब से उसे आभूषण निर्माण और कामकाज में उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और पारस्परिक विश्वास ही मुख्य आधार होता है।
गणेश ने अपनी शिकायत में बताया कि बीसी फंड का संचालन आरोपितों सोंटू मांझी, माणिक सामांता, कार्तिक, अनिल, सुदीप मोंडोल, तपोस मोंडोल, तापस मान्ना, पोलास, प्रसातो घोराई, विजेंद्र मोईती और विभाष घोराई द्वारा किया जा रहा था। इन्हीं कारीगरों ने फंड से सोना एकत्र कर आभूषण निर्माण के नाम पर जमा रखा था, जिसे अचानक गायब कर दिया गया।
यह भी आरोप लगाया गया कि सोमीर भाईती, उत्तम खोमराई, कार्तिक, साईफूल, निसित, हिदायत और दिलीप सोनी सहित कई कारीगर कुल 900 ग्राम से अधिक सोना लेकर बिना पूर्व सूचना के गायब हो गए।
शहर में मची हलचल
सूचना मिलते ही सभी ज्वेलर्स के बीच खलबली मच गई। बताया गया कि जब पीड़ितों ने आरोपितों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनमें से एक ने फोन पर बताया कि वे मुंबई पहुँच चुके हैं और वापस आने से साफ इंकार कर दिया। इस बयान ने ज्वेलरी बाजार में सनसनी फैला दी।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के बाद पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने त्वरित जांच के आदेश जारी किए हैं। पुलिस टीमें सभी आरोपितों की तलाश में जुट गई हैं। ज्वेलर्स ने यह चिंता भी जताई है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो शहर का ज्वेलरी व्यवसाय गंभीर नुकसान झेल सकता है।
भंवरकुआं में अंतरराज्यीय गिरोह की ठगी
दूसरी बड़ी घटना इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र में हुई जहाँ एक अंतरराज्यीय गिरोह ने ज्वेलर आसित हाजरा से लगभग 50 लाख रुपये कीमत के सोने के आभूषणों की ठगी की। पीड़ित ज्वेलर पल्हर नगर निवासी है और वह सोना-चांदी के आभूषण बनाने का काम करता है।
ठगी का तरीका
ठगों ने खुद को ग्राहक बताकर मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया और बताया कि वह पांच रानी हार बनवाना चाहता है। उसकी बातों पर विश्वास करते हुए आसित ने उसे बुलाया। ठग ने अपने एक साथी को रिश्तेदार बनाकर भेजा जिसने पांच रानी हार और पांच जोडि कान के झुमके प्राप्त कर लिए। बदले में उसने ठोस सोने के बिस्कुट देने की बात कही।
लेकिन जब ज्वेलर ने घर जाकर बिस्कुटों की जांच की तो वे नकली निकले। उन पर सिर्फ सोने की परत चढ़ाई गई थी। तब जाकर ठगी का खुलासा हुआ।
गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
घटना की शिकायत मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई। भंवरकुआं थाने के टीआई राजकुमार यादव की टीम ने मोबाइल नंबर के आधार पर सबसे पहले संजय नामक आरोपी को पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने जोधपुर और ऋषिकेश में दबिश देकर गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। लाखों रुपये कीमत का सोना भी बरामद कर लिया गया है।
ज्वेलरी कारोबारियों में बढ़ी बेचैनी
इन दोनों घटनाओं के बाद शहर के ज्वेलर्स बेहद सतर्क हो गए हैं। विश्वसनीय कारीगर ढूंढ़ना पहले ही मुश्किल था, अब धोखाधड़ी के ये तरीके कारोबारियों को और चिंतित कर रहे हैं। कई ज्वेलर्स का कहना है कि कारीगरों व ग्राहकों की असली पहचान व भरोसे की कड़ी से ही यह व्यवसाय चलता है, और ऐसे में ठगी की बढ़ती घटनाएं पूरी व्यापारिक प्रणाली को कमजोर कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना
व्यापार सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार ज्वेलर्स को अब आधुनिक सिस्टम अपनाने की जरूरत है। इसमें कारीगरों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया, सोने की वास्तविकता की तुरंत जांच, डिजिटल अनुबंध और CCTV निगरानी को मजबूत बनाना शामिल है।
