मुख्य बातें
- नगर निगम के अभियान में 5 लाख से अधिक सेग्रीगेशन सेल्फी प्राप्त होने का दावा।
- अभियान का उद्देश्य घर-घर कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- शहर के सभी 85 वार्डों से नागरिकों की भागीदारी।
- अभियान के अगले चरण में स्वच्छता जागरूकता के लिए वॉकथॉन का आयोजन।

इंदौर सेग्रीगेशन सेल्फी अभियान बना जनभागीदारी का बड़ा उदाहरण
स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले इंदौर ने एक बार फिर नागरिक सहभागिता आधारित पहल से ध्यान आकर्षित किया है। नगर निगम के अनुसार “सफाई अपनाओ-बीमारी भगाओ” अभियान के अंतर्गत आयोजित इंदौर सेग्रीगेशन सेल्फी अभियान में एक ही दिन में पांच लाख से अधिक सेल्फी प्राप्त हुईं। निगम का दावा है कि यह संख्या विश्व रिकॉर्ड के स्तर तक पहुंची।
इस पहल का मूल उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि घर-घर कचरे के पृथक्करण (Segregation) की आदत को जनआंदोलन का रूप देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तभी प्रभावी हो सकता है, जब नागरिक गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग देने की जिम्मेदारी निभाएं।
कचरा पृथक्करण क्यों है महत्वपूर्ण
किसी भी आधुनिक शहर की स्वच्छता व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि स्रोत स्तर पर कचरा अलग किया जा रहा है या नहीं।
यदि जैविक और अजैविक कचरा अलग-अलग एकत्र होता है तो—
- रीसाइक्लिंग आसान होती है।
- लैंडफिल पर दबाव कम पड़ता है।
- कम्पोस्ट तैयार करना संभव होता है।
- प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।
इसी सोच को व्यवहार में बदलने के लिए नगर निगम ने नागरिकों से कचरा डालते समय “सेग्रीगेशन सेल्फी” साझा करने की अपील की।
85 वार्डों से मिला व्यापक समर्थन
नगर निगम के अनुसार अभियान में शहर के सभी 85 वार्डों से नागरिकों ने भागीदारी की। सुबह शुरू हुए अभियान में दोपहर तक लाखों सेल्फी प्राप्त होने लगीं और दिन समाप्त होने तक संख्या पांच लाख से अधिक पहुंचने का दावा किया गया।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह के अभियान लोगों को केवल संदेश नहीं देते, बल्कि उन्हें स्वच्छता अभियान का सक्रिय भागीदार भी बनाते हैं।
स्वच्छता में इंदौर का मॉडल
इंदौर कई वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल करता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी प्रमुख वजह केवल सफाई व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की निरंतर भागीदारी, घर-घर कचरा संग्रहण, स्रोत पर पृथक्करण और स्थानीय प्रशासन की निगरानी भी है।
स्वच्छता अभियानों में सामाजिक संगठनों, स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आवासीय समितियों की भागीदारी ने भी इस मॉडल को मजबूत किया है।
वॉकथॉन से जुड़ रही जनजागरूकता
नगर निगम ने अभियान के अगले चरण में “सफाई अपनाओ-बीमारी भगाओ” थीम पर वॉकथॉन आयोजित करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य नागरिकों को स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन स्वच्छता को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
क्या केवल रिकॉर्ड बनाना पर्याप्त है?
स्वच्छता विशेषज्ञों का मानना है कि किसी अभियान की वास्तविक सफलता रिकॉर्ड संख्या से नहीं, बल्कि उसके स्थायी प्रभाव से मापी जाती है।
यदि नागरिक नियमित रूप से—
- गीला और सूखा कचरा अलग रखें,
- प्लास्टिक का जिम्मेदारी से निपटान करें,
- घरेलू कम्पोस्टिंग अपनाएं,
- नगर निगम की संग्रहण व्यवस्था का सहयोग करें,
तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकती है।
देश के अन्य शहर क्या सीख सकते हैं
इंदौर का यह अभियान यह संकेत देता है कि डिजिटल भागीदारी और सामाजिक अभियानों को जोड़कर नागरिकों को बड़े स्तर पर जोड़ा जा सकता है। यदि स्थानीय निकाय इस प्रकार के नवाचारों को नियमित व्यवहार परिवर्तन अभियानों के साथ जोड़ें, तो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
निष्कर्ष
इंदौर सेग्रीगेशन सेल्फी अभियान केवल बड़ी संख्या में भेजी गई तस्वीरों का अभियान नहीं, बल्कि यह नागरिक भागीदारी, स्वच्छता संस्कृति और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने का प्रयास है। यदि यह जागरूकता रोजमर्रा की आदत में बदलती है, तो इसका लाभ केवल इंदौर ही नहीं बल्कि अन्य शहरों को भी मिल सकता है।
FAQ
1. सेग्रीगेशन सेल्फी अभियान क्या है?
सेग्रीगेशन सेल्फी अभियान एक जनजागरूकता पहल है, जिसमें नागरिकों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालते समय फोटो लेकर नगर निगम के साथ साझा करने की अपील की गई। इसका उद्देश्य स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण की आदत को बढ़ावा देना है।
2. कचरा पृथक्करण (Segregation) क्यों जरूरी है?
कचरे को गीला, सूखा और घरेलू खतरनाक श्रेणियों में अलग करने से रीसाइक्लिंग आसान होती है, कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है और लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होती है। इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ शहर बनाने में मदद मिलती है।
3. क्या इंदौर ने वास्तव में विश्व रिकॉर्ड बनाया है?
नगर निगम ने अभियान के दौरान पांच लाख से अधिक सेग्रीगेशन सेल्फी प्राप्त होने का दावा करते हुए इसे विश्व रिकॉर्ड बताया है। किसी भी रिकॉर्ड की आधिकारिक मान्यता संबंधित रिकॉर्ड प्रमाणित करने वाली संस्था की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप से स्पष्ट होती है।
4. सफाई अपनाओ-बीमारी भगाओ अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को स्वच्छता, कचरा पृथक्करण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। अभियान के माध्यम से लोगों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
5. घर पर सही तरीके से कचरा अलग कैसे करें?
घर में कम से कम दो डस्टबिन रखें। एक में गीला कचरा जैसे भोजन और सब्जियों के अवशेष डालें, जबकि दूसरे में सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच रखें। ई-वेस्ट और मेडिकल वेस्ट को अलग संग्रहित कर निर्धारित केंद्रों पर ही जमा करें।
6. क्या अन्य शहर भी ऐसा अभियान शुरू कर सकते हैं?
हाँ। यदि स्थानीय निकाय पर्याप्त जनसंपर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करें तो इस तरह के अभियान अन्य शहरों में भी सफल हो सकते हैं। इससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।






