ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण सूखे से गुजर रहा है। तेहरान से लेकर छोटे कस्बों तक, हर ओर सूखते जलाशय, फटी धरती और पानी के लिए जूझते लोग दिख रहे हैं। राजधानी तेहरान, जो देश का सबसे बड़ा और घनी आबादी वाला शहर है, अब पानी के अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की बारिश पिछले कई दशकों के मुकाबले 92 प्रतिशत तक कम हुई है। लातियन और करज जैसे प्रमुख बांधों में अब मात्र 10 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है, और वह भी “मृत जल” (Dead Water) है — यानी ऐसा पानी जिसे पीने या उपयोग में लाना सुरक्षित नहीं है।

सरकारी एजेंसियां लगातार जनता से अपील कर रही हैं कि वे हर बूंद पानी की बचत करें। लेकिन हालात इतने खराब हैं कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को कहना पड़ा —
“अगर आने वाले महीनों में बारिश नहीं हुई, तो हमें तेहरान जैसे बड़े शहरों को भी खाली करने पर विचार करना पड़ सकता है।”
यह बयान न केवल एक चेतावनी है, बल्कि यह दिखाता है कि ईरान अब जलवायु परिवर्तन की मार झेलने वाला एक और बड़ा उदाहरण बन चुका है।
क्यों आया ईरान इस हाल में?
ईरान पश्चिम एशिया का वह देश है जहाँ रेगिस्तान पहले से ही धरती के बड़े हिस्से को ढके हुए हैं। लेकिन अब मौसम परिवर्तन, अत्यधिक दोहन और गलत जल प्रबंधन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान में तेज़ी से शहरीकरण (Urbanization) हुआ। आबादी के दबाव के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरा। औद्योगिक और कृषि क्षेत्र ने भी अंधाधुंध जल निकासी की, जिससे प्राकृतिक जल-स्रोत लगभग समाप्त हो गए।
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में ईरान में औसत तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। यह छोटा सा बदलाव भी जलवाष्पीकरण (Evaporation) को कई गुना बढ़ा देता है।
तेहरान के सूखे बांध: ‘मौत के कुएं’ बनते जा रहे हैं
राजधानी के दो सबसे बड़े जल स्रोत – लातियन डैम (Latian Dam) और करज डैम (Karaj Dam) अब लगभग सूख चुके हैं। पहले ये बांध हर साल लाखों नागरिकों की जरूरतें पूरी करते थे, लेकिन अब इनका जल स्तर ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया है। लातियन डैम के एक इंजीनियर ने बताया –
“हमारे पास जो पानी बचा है, वह केवल कुछ हफ्तों तक चल सकता है। इसके बाद हमें पूरी राजधानी के लिए पानी का राशन लागू करना पड़ेगा।”
रात के समय पानी की सप्लाई को पहले ही बंद किया जा चुका है। कुछ इलाकों में तो नल से कई-कई घंटे तक पानी नहीं आता।
सरकार के आपात कदम – लेकिन क्या ये काफी हैं?
ईरान सरकार ने पानी बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं:
- उच्च खपत पर भारी जुर्माना।
- रात में पानी की सप्लाई बंद।
- औद्योगिक उपयोग पर नियंत्रण।
- घरेलू स्तर पर पानी पुनर्चक्रण (Recycling) को प्रोत्साहन।
ऊर्जा मंत्री अब्बास अली अबादी ने कहा कि जल्द ही ऐसे शहरों में रात में पानी का प्रवाह “शून्य” तक कर दिया जाएगा। परंतु विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अल्पकालिक समाधान हैं। यदि जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन पर बड़े स्तर पर नीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में पूरे मध्य-पूर्व में पानी को लेकर संघर्ष होना तय है।
सांसद का विवादित बयान – सूखे के लिए महिलाओं को ठहराया जिम्मेदार!
जहाँ सरकार वैज्ञानिक तरीके से समाधान ढूंढ रही है, वहीं राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर है। विशेषज्ञ सभा के सदस्य और सांसद मोहसिन अराकी ने बेहद विवादास्पद बयान देते हुए कहा –
“ईरान में महिलाएँ जब अल्लाह के हुक्म के अनुसार हिजाब नहीं पहनतीं, तो यह खुदा का क्रोध है कि बारिश नहीं होती।”
यह बयान तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ईरान के हजारों नागरिकों ने इस बयान की आलोचना की और कहा कि “महिलाओं को दोष देने के बजाय सरकार को अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए।” ईरान की महिलाएँ पहले से ही हिजाब कानून को लेकर संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में इस तरह का बयान धार्मिक रूढ़िवाद और जलवायु संकट के बीच के टकराव को और गहरा कर देता है।
आसमान से राहत की कोई उम्मीद नहीं
ईरान के मौसम विभाग ने बताया कि अगले 10 दिनों तक कहीं भी बारिश की संभावना नहीं है। तेहरान में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और धूल भरी हवाएं आम हैं। गांवों में पानी की टंकियों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई परिवार अपने बच्चों को दूर के इलाकों में भेज रहे हैं ताकि वे पानी की कमी से न जूझें। किसानों की हालत सबसे खराब है — खेत सूख चुके हैं, फसलें नष्ट हो रही हैं और पशुधन मर रहे हैं।
‘देश खाली करने’ की चेतावनी – मजाक या सच्चाई?
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का बयान कि “जरूरत पड़ी तो तेहरान को खाली करना पड़ सकता है” सुनकर बहुतों ने इसे मजाक समझा।
पूर्व मेयर गुलाम हुसैन करबास्ची ने इसे “व्यावहारिक रूप से असंभव” बताया। परंतु जल विशेषज्ञों का कहना है कि यह मजाक नहीं, बल्कि भविष्य की हकीकत हो सकती है। यदि भूजल स्तर लगातार गिरता रहा और बारिश नहीं हुई, तो 2 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले तेहरान में जीवन असंभव हो जाएगा।
लोगों की पीड़ा – पानी के लिए जंग
सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जहाँ नागरिक खाली नल और सूखे टैंकरों के बीच संघर्ष करते दिख रहे हैं। एक रैपर वफा अहमदपूर ने लिखा –
“हमारे शहर में पानी अब ‘लग्जरी’ हो गया है। बच्चे प्यासे सोते हैं और सरकार हमें सिर्फ सब्र करने की सलाह देती है।”
कई नागरिक अब पानी खरीदने को मजबूर हैं। एक गैलन पानी की कीमत कुछ इलाकों में 5 डॉलर तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों की राय – सूखा केवल प्राकृतिक नहीं, प्रशासनिक विफलता भी है
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह संकट केवल “प्राकृतिक” नहीं है। यह सरकार की वर्षों की अविवेकपूर्ण नीतियों का परिणाम है।
- अंधाधुंध डैम निर्माण और भूजल दोहन,
- पुरानी पाइपलाइनें जिनसे 30% पानी बर्बाद होता है,
- और कृषि नीति में बदलाव की कमी — इन सबने मिलकर इस संकट को जन्म दिया है।
यदि अब भी देश सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट (सतत जल प्रबंधन) की ओर नहीं बढ़ा, तो अगले दशक में ईरान का आधा हिस्सा “अनलिवेबल ज़ोन” (अबसंयोग्य क्षेत्र) बन सकता है।
भविष्य की राह – क्या सीख सकते हैं बाकी देश?
ईरान का यह संकट केवल उसका अपना नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी की घंटी है। भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब और अफ्रीका के कई देश भी समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। पानी बचाने की आदत, वर्षा जल संचयन, और सरकारों की सक्रिय नीति — यही आगे की राह है। वरना, जैसा कि एक ईरानी नागरिक ने कहा –
“आज ईरान सूख रहा है, कल शायद कोई और देश। पानी की हर बूंद अब जीवन का सवाल है।”
