बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का नाम बार-बार सुर्खियों में रहता है। 2025 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राजद की करारी हार के साथ ही लालू परिवार के भीतर राजनीतिक और व्यक्तिगत विवाद भी उभरकर सामने आए हैं। इस बार विवाद की मुख्य वजह बनी लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य, जिन्होंने अपने परिवार और पार्टी से दूरी बनाने का एलान किया और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने खिलाफ प्रताड़ना के आरोप लगाए।

14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से खुलासा किया कि उन्हें उनके भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। रोहिणी ने आरोप लगाया कि उन्हें चप्पल फेंकी गई, अपशब्द कहे गए और उनके पिता को गंदी किडनी लगाने जैसे आपत्तिजनक शब्दों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके भाई के करीबी सहयोगियों, संजय यादव और रमीज ने उन्हें परेशान किया।
रोहिणी के आरोपों के एक दिन बाद उनकी तीन बहनें – रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी – अपने बच्चों के साथ लालू का पटना स्थित आवास छोड़कर दिल्ली चली गईं। इससे परिवार में कलह और बढ़ गई। इस घटना ने सिर्फ परिवार के भीतर की परिस्थितियों को उजागर नहीं किया, बल्कि राजद के राजनीतिक माहौल पर भी प्रभाव डाला।
इस विवाद ने यह सवाल उठाया कि लालू परिवार के सदस्य राजनीति में सक्रिय रहते हुए व्यक्तिगत और पारिवारिक मुद्दों का सामना कैसे करते हैं। रोहिणी के मामले में परिवार की प्रतिक्रिया सीमित रही। तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव ने बयान दिया कि बहन के अपमान को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर परिवार को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया तो जनता गद्दारों को कभी माफ नहीं करेगी।
लालू प्रसाद यादव का जन्म 1948 में बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ। उनके माता-पिता कुंदन राय और मरछिया देवी थे। लालू का परिवार कुल सात भाई-बहनों में फैला हुआ था। उनके भाई मंगरु यादव, गुलाब यादव, मुकुंद यादव, महावीर यादव, शुकदेव यादव और बहन गंगोत्री देवी शामिल थीं। इनमें से अधिकांश अब इस दुनिया में नहीं हैं।
लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी भी बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनके नौ संतानें हैं, जिनमें दो बेटे – तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव – और सात बेटियां – मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, चंदा सिंह, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का राव (धन्नु) और राजलक्ष्मी यादव शामिल हैं।
मीसा भारती सबसे बड़ी संतान हैं। उन्होंने 1999 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर शैलेश कुमार से शादी की और उनके तीन बच्चे हैं। मीसा 2014 में पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी थीं और 2024 में सांसद बनीं। रोहिणी आचार्य लालू की दूसरी बेटी हैं। 2024 में सारण से चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। रोहिणी 2022 में अपने पिता को किडनी देने के कारण चर्चा में आई थीं। उनकी शादी राव समरेश सिंह से हुई है और उनके तीन बच्चे हैं।
तीसरी बेटी चंदा ने एलएलबी की पढ़ाई की और फ्लाइट पायलट विक्रम सिंह से शादी की। चौथी बेटी रागिनी यादव ने बीटेक की पढ़ाई शुरू की लेकिन पूरी नहीं की और समाजवादी पार्टी के नेता के बेटे से विवाह किया। पांचवीं बेटी हेमा यादव ने बीटेक की पढ़ाई की और राजनीतिक परिवार से शादी की। छठी बेटी अनुष्का राव ने इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स किया और हरियाणा के मंत्री के बेटे से शादी की। सातवीं बेटी राजलक्ष्मी यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पोते से शादी की।
बेटों में तेजप्रताप यादव 1988 में जन्मे और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। तेजस्वी यादव सबसे छोटे पुत्र हैं, जिन्होंने क्रिकेट में करियर बनाने के लिए स्कूल छोड़ दिया। वह बिहार विधानसभा में विधायक हैं और दो बार उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
रोहिणी आचार्य का मामला परिवार के भीतर विवाद और राजद की राजनीतिक रणनीति दोनों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि परिवारिक कलह पार्टी की छवि और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में जब पार्टी बिहार में अपने खोए समर्थन को पुनः हासिल करने की कोशिश कर रही है, परिवारिक विवाद पार्टी की राजनीति में अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।
रोहिणी की सोशल मीडिया पोस्ट ने न केवल परिवारिक विवाद को उजागर किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि राजद के भीतर सत्ता और प्रभाव की राजनीति कितनी जटिल और संवेदनशील है। परिवार और पार्टी दोनों में संतुलन बनाए रखना किसी भी राजनीतिक परिवार के लिए कठिन कार्य होता है।
इस विवाद के कारण राजद के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी असमंजस पैदा हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान अब सिर्फ चुनाव परिणाम पर नहीं, बल्कि परिवारिक कलह को नियंत्रित करने और पार्टी की छवि को सुधारने में भी लगा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोहिणी के मामले में मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही, जिसने परिवारिक विवाद को सार्वजनिक मंच पर ला दिया।
इस घटना ने यह भी साबित किया कि व्यक्तिगत और पारिवारिक मुद्दों का राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भारतीय राजनीति में बड़े राजनीतिक परिवारों के भीतर विवाद अक्सर चुनावी रणनीति, पार्टी की छवि और कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करते हैं। लालू परिवार की यह स्थिति अन्य राजनीतिक परिवारों के लिए भी एक चेतावनी है कि पारिवारिक विवादों को समय रहते सुलझाना अत्यंत आवश्यक है।
