भारत में खेती से जुड़े करोड़ों किसानों के लिए वर्ष 2026 एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं, जो किसी भी राज्य या केंद्र सरकार की किसान योजना से जुड़े हैं या जो भविष्य में किसी भी प्रकार की सब्सिडी और सहायता लेना चाहते हैं, उनके लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है। अब किसान पंजीकरण ऑनलाइन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गई, बल्कि यह किसान की पहचान और अधिकार का सबसे अहम माध्यम बन चुकी है।

सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान की एक डिजिटल पहचान हो, जिससे योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा रोका जा सके। इसी उद्देश्य से सभी भारतीय राज्यों के लिए किसान पंजीकरण ऑनलाइन की व्यवस्था को मजबूत किया गया है और राज्यवार अलग-अलग आधिकारिक लिंक भी जारी किए गए हैं।
Farmer ID Registration 2026 क्या है और इसका मतलब
Farmer ID का सीधा अर्थ है हर किसान को एक अलग और यूनिक पहचान देना। यह पहचान एक डिजिटल आईडी के रूप में होती है, जिसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, जमीन का विवरण, फसल से जुड़ा रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी सुरक्षित रहती है। 2026 से फार्मर आईडी के बिना किसी भी बड़ी किसान योजना का लाभ मिलना लगभग असंभव हो गया है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि DAP और यूरिया जैसी खाद पर मिलने वाली सब्सिडी हो, कृषि यंत्रों पर मिलने वाला अनुदान हो, पीएम किसान योजना के तहत सालाना 6000 रुपये की सहायता हो या प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ, हर जगह Farmer ID जरूरी होगी। यहां तक कि कई राज्यों में फार्मर आईडी के बिना खाद की खरीद भी संभव नहीं होगी।
पीएम किसान योजना और फार्मर आईडी का सीधा कनेक्शन
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे किसानों के लिए फार्मर आईडी सबसे ज्यादा जरूरी हो गई है। सरकार ने यह साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में केवल वही किसान इस योजना के पात्र माने जाएंगे, जिनका किसान पंजीकरण ऑनलाइन पूरा है और जिनके पास वैध Farmer ID है।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का पैसा सही किसान के खाते में जाए और डुप्लीकेट या फर्जी लाभार्थियों को सिस्टम से बाहर किया जा सके। यही कारण है कि जिन किसानों को अब तक पीएम किसान की किस्त मिल रही है, उन्हें भी जल्द से जल्द फार्मर आईडी पंजीकरण पूरा करने की सलाह दी जा रही है।
सभी भारतीय राज्यों के लिए किसान पंजीकरण ऑनलाइन कैसे लागू किया गया
भारत के हर राज्य ने अपने स्तर पर Farmer ID Registration के लिए अलग-अलग पोर्टल लॉन्च किए हैं। हालांकि पोर्टल अलग हैं, लेकिन प्रक्रिया लगभग एक जैसी है। किसान अपने राज्य के आधिकारिक फार्मर आईडी पोर्टल पर जाकर नया पंजीकरण कर सकता है। इसके लिए आधार आधारित केवाईसी, मोबाइल नंबर सत्यापन और भूमि रिकॉर्ड की जानकारी देना अनिवार्य है।
राज्य सरकारों ने यह भी व्यवस्था की है कि किसान अपने ही राज्य के पोर्टल से पंजीकरण करें, ताकि स्थानीय भूमि रिकॉर्ड और कृषि डेटा को सही तरीके से जोड़ा जा सके। यही वजह है कि सभी राज्यों के अलग-अलग लिंक जारी किए गए हैं, जिससे किसान अपने राज्य के अनुसार रजिस्ट्रेशन कर सकें।
Farmer ID Registration कैसे करें, पूरी प्रक्रिया समझें
Farmer ID Registration की प्रक्रिया को सरल रखने की कोशिश की गई है ताकि ग्रामीण इलाकों के किसान भी इसे आसानी से पूरा कर सकें। किसान को सबसे पहले अपने राज्य के Farmer ID Registration पोर्टल पर जाना होता है। वहां नया उपयोगकर्ता पंजीकरण विकल्प दिया गया होता है। इसके बाद किसान को अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसमें आधार और मोबाइल नंबर का सत्यापन शामिल होता है।
केवाईसी पूरी होने के बाद किसान पोर्टल पर लॉगिन करता है और अपनी भूमि से संबंधित पूरी जानकारी भरता है। इसमें खसरा नंबर, खेत का रकबा और फसल से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। सारी जानकारी सही तरीके से भरने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाता है और किसान को उसकी Farmer ID जारी कर दी जाती है।
खाद, सब्सिडी और योजनाओं के लिए फार्मर आईडी क्यों जरूरी
सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे। अब DAP और यूरिया जैसी खाद पर मिलने वाली सब्सिडी भी Farmer ID से जुड़ी होगी। कई राज्यों में बिना फार्मर आईडी के खाद खरीदना भी संभव नहीं होगा। इससे कालाबाजारी और फर्जी खरीद पर रोक लगेगी।
कृषि यंत्र सब्सिडी, बीज अनुदान, सिंचाई सहायता और फसल बीमा जैसी योजनाओं में भी Farmer ID के जरिए ही किसान की पात्रता तय की जाएगी। इससे पूरी प्रणाली पारदर्शी बनेगी और किसान को बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राज्यवार पोर्टल और अलग-अलग लिंक की व्यवस्था क्यों
भारत में भूमि रिकॉर्ड और कृषि व्यवस्था राज्य सरकारों के अधीन होती है। इसी वजह से हर राज्य ने Farmer ID Registration के लिए अपना अलग पोर्टल बनाया है। हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, केरल, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने अपने-अपने पोर्टल सक्रिय कर दिए हैं।
किसान को उसी राज्य के पोर्टल से पंजीकरण करना होगा, जहां उसकी खेती की जमीन स्थित है। इससे डेटा की सटीकता बनी रहती है और भविष्य में किसी भी योजना का लाभ लेने में परेशानी नहीं होती।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए Farmer ID का महत्व
भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं। इनके लिए Farmer ID एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। डिजिटल पहचान के कारण ये किसान सीधे सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं और किसी भी योजना से वंचित नहीं रहते।
सरकार भी Farmer ID डेटा के आधार पर यह तय कर पाती है कि किस क्षेत्र में किस तरह की सहायता की जरूरत है। इससे नीति निर्माण बेहतर होता है और किसानों को वास्तविक लाभ मिलता है।
भविष्य में Farmer ID से क्या बदलेगा
आने वाले समय में Farmer ID को केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे फसल सलाह, मौसम अलर्ट, बाजार भाव और डिजिटल भुगतान से भी जोड़ा जाएगा। इससे किसान को एक ही प्लेटफॉर्म पर खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिल सकेगी।
यह व्यवस्था डिजिटल खेती और स्मार्ट एग्रीकल्चर की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
अखिल भारतीय केंद्रीय Farmer ID पोर्टल
यह पोर्टल सभी राज्यों के लिए आधार है और यहीं से राज्यवार रजिस्ट्रेशन या रीडायरेक्शन किया जाता है।
https://farmerregistry.gov.in
सभी भारतीय राज्यों के लिए किसान पंजीकरण ऑनलाइन – राज्यवार विवरण
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में किसान पंजीकरण को भूमि रिकॉर्ड और फसल डेटा से जोड़ा गया है। Farmer ID के माध्यम से सब्सिडी और बीज वितरण किया जाता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://apagrisnet.gov.in
अरुणाचल प्रदेश
यहाँ Farmer ID का उपयोग योजनाओं की पहचान और सीमांत किसानों को जोड़ने के लिए किया जा रहा है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.arunachal.gov.in
असम
असम में किसान पंजीकरण ऑनलाइन को फसल बीमा और खाद सब्सिडी से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.assam.gov.in
बिहार
बिहार में Farmer ID के बिना कृषि अनुदान और योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
आधिकारिक पोर्टल: https://dbtagriculture.bihar.gov.in
छत्तीसगढ़
राज्य में किसान पंजीकरण को धान खरीद और इनपुट सब्सिडी से लिंक किया गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriportal.cg.nic.in
गोवा
गोवा में डिजिटल किसान पहचान को राज्य योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.goa.gov.in
गुजरात
गुजरात में Farmer ID के जरिए सब्सिडी और कृषि यंत्र योजना लागू होती है।
आधिकारिक पोर्टल: https://ikhedut.gujarat.gov.in
हरियाणा
हरियाणा में Farmer ID के बिना खाद और सब्सिडी मिलना कठिन होगा।
आधिकारिक पोर्टल: https://fasal.haryana.gov.in
हिमाचल प्रदेश
यहाँ किसान पंजीकरण ऑनलाइन को पहाड़ी खेती योजनाओं से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriculture.hp.gov.in
झारखंड
झारखंड में Farmer ID से बीज और सहायता योजनाओं का लाभ मिलता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.jharkhand.gov.in
कर्नाटक
कर्नाटक में Farmer ID को भूमि रिकॉर्ड और फसल बीमा से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://raitamitra.karnataka.gov.in
केरल
केरल में डिजिटल किसान पहचान का उपयोग सब्सिडी और सहायता वितरण के लिए होता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://www.keralaagriculture.gov.in
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में Farmer ID के बिना किसान योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
आधिकारिक पोर्टल: https://mpkrishi.mp.gov.in
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में Farmer ID को DBT और कृषि सब्सिडी से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://mahadbt.maharashtra.gov.in
मणिपुर
यहाँ किसान पंजीकरण को राज्य सहायता योजनाओं से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.manipur.gov.in
मेघालय
मेघालय में Farmer ID से कृषि सहायता वितरण होता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://megagriculture.gov.in
मिजोरम
मिजोरम में डिजिटल किसान पहचान को योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriculture.mizoram.gov.in
नागालैंड
यहाँ Farmer ID से किसानों की पहचान और सहायता तय होती है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.nagaland.gov.in
ओडिशा
ओडिशा में Farmer ID को कालिया योजना और अन्य लाभों से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.odisha.gov.in
पंजाब
पंजाब में Farmer ID खाद, बीज और सब्सिडी के लिए जरूरी है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agripunjab.gov.in
राजस्थान
राजस्थान में किसान पंजीकरण ऑनलाइन को DBT योजनाओं से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriculture.rajasthan.gov.in
सिक्किम
यहाँ Farmer ID से जैविक खेती योजनाओं का लाभ मिलता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://sikkimagrisnet.org
तमिलनाडु
तमिलनाडु में Farmer ID कृषि सहायता और बीमा से जुड़ी है।
आधिकारिक पोर्टल: https://www.tnagrisnet.tn.gov.in
तेलंगाना
तेलंगाना में Farmer ID को रायथु बंधु और योजनाओं से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.telangana.gov.in
त्रिपुरा
यहाँ किसान पंजीकरण से योजनाओं का लाभ तय होता है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agri.tripura.gov.in
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में Farmer ID के बिना पीएम किसान और सब्सिडी नहीं मिलेगी।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriculture.up.gov.in
उत्तराखंड
उत्तराखंड में किसान पंजीकरण ऑनलाइन को पर्वतीय योजनाओं से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://agriculture.uk.gov.in
पश्चिम बंगाल
यहाँ Farmer ID को किसान सहायता और बीज योजना से जोड़ा गया है।
आधिकारिक पोर्टल: https://wbagrisnet.gov.in
केंद्र शासित प्रदेश
दिल्ली
जम्मू और कश्मीर
लद्दाख
चंडीगढ़
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
पुडुचेरी
अंडमान और निकोबार
लक्षद्वीप
महत्वपूर्ण सूचना
2026 से Farmer ID केंद्र सरकार की Farmer Registry प्रणाली से अनिवार्य रूप से जुड़ी है, इसलिए अगर किसी राज्य का अलग लिंक काम न करे तो किसान सीधे farmerregistry.gov.in पर जाकर अपने राज्य का चयन करके पंजीकरण कर सकते हैं।
PM Kisan लाभार्थियों के लिए Farmer ID जरूरी क्यों हो गई है, जानिए पूरा सच
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भारत सरकार की सबसे बड़ी किसान सहायता योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। अब तक करोड़ों किसान इस योजना का लाभ ले चुके हैं, लेकिन 2026 से इस योजना में एक बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि PM Kisan योजना का लाभ लेने वाले हर किसान के लिए Farmer ID अनिवार्य होगी।
इस फैसले के पीछे सरकार की सबसे बड़ी वजह पारदर्शिता और सही लाभार्थी की पहचान है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कई ऐसे लोग भी पीएम किसान योजना का लाभ ले रहे थे, जो वास्तव में किसान नहीं थे या जिनकी भूमि से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं थी। Farmer ID के जरिए सरकार हर किसान की डिजिटल पहचान तैयार कर रही है, जिसमें उसकी जमीन, फसल, बैंक खाता और व्यक्तिगत विवरण एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज रहेगा।
PM Kisan लाभार्थियों के लिए Farmer ID इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में योजना की पात्रता का निर्धारण इसी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। अगर किसान की Farmer ID नहीं बनी है, तो उसकी किस्त रोकी जा सकती है या भविष्य में योजना से बाहर भी किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि योजना का पैसा केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे।
Farmer ID बनने के बाद किसान को बार-बार अलग-अलग योजनाओं के लिए दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही Farmer ID से पीएम किसान, फसल बीमा, खाद सब्सिडी और कृषि यंत्र सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। यही कारण है कि PM Kisan लाभार्थियों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द अपने राज्य के पोर्टल पर जाकर Farmer ID पंजीकरण पूरा करें।
Farmer ID नहीं बनी तो क्या-क्या नुकसान होगा, जानिए किसानों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी
कई किसान अभी भी Farmer ID को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया है। लेकिन सच्चाई यह है कि 2026 से Farmer ID के बिना किसान को कई बड़े नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भविष्य में लगभग सभी किसान योजनाएं Farmer ID से लिंक होंगी।
अगर Farmer ID नहीं बनी है तो सबसे पहला और बड़ा नुकसान पीएम किसान योजना से जुड़ा है। ऐसे किसानों की किस्त रोकी जा सकती है या उन्हें योजना से अपात्र घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा खाद पर मिलने वाली सब्सिडी, खासकर DAP और यूरिया, भी Farmer ID से जुड़ी होगी। कई राज्यों में बिना Farmer ID के खाद खरीदना भी संभव नहीं होगा।
Farmer ID नहीं होने की स्थिति में किसान को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी से भी वंचित रहना पड़ सकता है। ट्रैक्टर, स्प्रे मशीन, ड्रिप सिंचाई जैसे उपकरणों पर मिलने वाला अनुदान केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनकी Farmer ID सिस्टम में दर्ज होगी। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी Farmer ID के बिना मिलना मुश्किल हो जाएगा।
सबसे बड़ा नुकसान यह है कि Farmer ID के बिना किसान सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि आपदा, सूखा, बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक संकट के समय सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत भी ऐसे किसानों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगी। भविष्य में डिजिटल खेती और स्मार्ट एग्रीकल्चर से जुड़ी सुविधाओं का लाभ भी Farmer ID के आधार पर ही दिया जाएगा।
इसलिए हर किसान के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह Farmer ID को नजरअंदाज न करे। यह केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि आने वाले समय में किसान की आर्थिक सुरक्षा और अधिकार का सबसे मजबूत आधार बनने जा रही है।
बहुत जरूरी जानकारी (2026 Update)
2026 से PM Kisan Yojana, खाद सब्सिडी, DAP/यूरिया, कृषि यंत्र सब्सिडी, फसल बीमा और सभी DBT योजनाओं के लिए Farmer ID अनिवार्य कर दी गई है।
अगर किसी राज्य का पोर्टल सीधे Farmer ID रजिस्ट्रेशन न दिखाए, तो वही पोर्टल आपको farmerregistry.gov.in पर redirect करेगा।
किसान हमेशा उसी राज्य के पोर्टल से रजिस्ट्रेशन करें जहां उनकी जमीन स्थित है, तभी रिकॉर्ड सही तरीके से लिंक होगा।
