दिल्ली में हुए भीषण धमाके को भारत सरकार ने बुधवार शाम आतंकी हमला घोषित कर दिया है। यह ऐलान होते ही पाकिस्तान में खलबली मच गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बीच देर रात आपात बैठक बुलाई गई, जिसके बाद अचानक पाकिस्तानी सेना की भारी मूवमेंट लाहौर की ओर शुरू हो गई।

सूत्रों के अनुसार, लाहौर, सियालकोट और वाघा बॉर्डर पर टैंकों और आर्टिलरी वाहनों की तैनाती की जा रही है। पाकिस्तान के भीतर इसे “सुरक्षा कवच” कहा जा रहा है, पर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम भारत के संभावित जवाबी एक्शन के डर से उठाया गया है।
भारत की घोषणा से मचा हड़कंप
भारत सरकार ने कैबिनेट की आपात बैठक के बाद स्पष्ट किया कि दिल्ली में लाल किले के पास हुआ धमाका “एक सुनियोजित आतंकी हमला” था, जिसके तार पाकिस्तान की जमीन से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त शब्दों में कहा —
“भारत के दुश्मन यह जान लें कि इस बार किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा।”
सेना प्रमुख जनरल अरुण मिश्रा ने भी चेतावनी दी —
“अगर पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर 1.0 से सबक नहीं लिया, तो 2.0 के लिए तैयार रहे।”
यह बयान पाकिस्तान के लिए बिजली की तरह गिरा। पाकिस्तान की मीडिया ने इसे “भारतीय युद्ध चेतावनी” बताया और देशभर में तुरंत रेड अलर्ट जारी कर दिया गया।
लाहौर क्यों बना पहली प्राथमिकता?
भारत की किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले पाकिस्तान ने लाहौर को सुरक्षित करने का निर्णय लिया है। कारण स्पष्ट हैं:
- भौगोलिक स्थिति: लाहौर भारत-पाक बॉर्डर से मात्र 25 किलोमीटर दूर है, इसलिए यह भारतीय हमले की पहली ज़द में आ सकता है।
- आर्थिक महत्व: कराची के बाद लाहौर पाकिस्तान का सबसे बड़ा औद्योगिक और आर्थिक केंद्र है — कपड़ा, इंजीनियरिंग, IT, और सेवाओं का प्रमुख हब।
- सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र: पाकिस्तान की पहचान और संस्कृति का प्रतीक शहर होने के नाते, लाहौर पर हमला पाकिस्तान की “प्रतिष्ठा” पर चोट माना जाएगा।
इसी वजह से जनरल मुनीर ने पहले चरण में लाहौर के चारों ओर रक्षात्मक घेरा बनाने के आदेश दिए।
सेना में सभी छुट्टियाँ रद्द
सेना मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सभी रक्षा ठिकानों पर सभी छुट्टियाँ तत्काल रद्द कर दी गई हैं।
सैनिकों को बेस कैंप्स से बाहर निकलने से मना किया गया है और “पूर्ण युद्ध स्थिति” में तैनात रहने को कहा गया है।
सूत्रों का दावा है कि अगले 72 घंटों में पाकिस्तान मिसाइल परीक्षण भी कर सकता है — ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर का साया फिर से
भारत के पिछले सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर की याद पाकिस्तान में आज भी ताजा है। 2024 में जब भारतीय सेना ने सीमापार आतंकियों के खिलाफ सटीक कार्रवाई की थी, तब पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा था।
अब एक बार फिर “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” की चर्चा हो रही है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर भारत को पाकिस्तान की ओर से किसी आतंकी समर्थन के ठोस सबूत मिले, तो यह ऑपरेशन दोबारा शुरू हो सकता है।
इस्लामाबाद में तनाव और भय
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बताई जा रही है। सरकारी दफ्तरों में अफरातफरी है, और प्रधानमंत्री हाउस के बाहर सुरक्षा चौकियों को दोगुना कर दिया गया है।
स्थानीय मीडिया चैनल्स “भारत के हमले की तैयारी” की खबरें चला रहे हैं। ट्विटर (अब X) पर #LahoreOnAlert और #IndiaResponse जैसे ट्रेंड चल रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से खबर आई —
“सेना ने पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों से भी कुछ टुकड़ियों को लाहौर बुलाया है। हमें डर है कि भारत के जवाबी हमले की शुरुआत सीमा के इसी क्षेत्र से होगी।”
पाकिस्तानी जनता में फैली अफवाहें और भय
लाहौर और आसपास के जिलों में लोगों में डर का माहौल है। कई परिवार अपने बच्चों को ग्रामीण इलाकों की ओर भेज रहे हैं। बाजारों में भीड़ कम हो गई है, पेट्रोल पंपों पर अफरातफरी है।
एक लाहौर निवासी ने बताया —
“हमने पहले कभी ऐसा माहौल नहीं देखा। सड़कों पर टैंक, जवान और फाइटर जेट्स की आवाजें सुनकर लगता है जैसे जंग बस शुरू ही होने वाली है।”
भारत की सैन्य तैयारी
उधर भारत में भी सीमावर्ती राज्यों पंजाब, जम्मू और राजस्थान में सैन्य गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। भारतीय वायुसेना के रडार अलर्ट मोड में हैं और सीमा सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि किसी भी “संभावित आक्रामक हरकत” पर तुरंत जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा —
“हम स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। भारत को अपनी सुरक्षा की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन तनाव कम करने की दिशा में भी बातचीत ज़रूरी है।”
इसी बीच चीन और तुर्की ने पाकिस्तान के साथ “एकजुटता” जताई है, जबकि रूस ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है।
पाकिस्तानी सरकार में फूट
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। मुनीर चाहते हैं कि सेना पहले से तैयार रहे, जबकि शहबाज “कूटनीतिक समाधान” के पक्ष में हैं।
राजनीतिक विश्लेषक इसे पाकिस्तान की “सिविल-मिलिट्री टकराव” की नई कड़ी मान रहे हैं।
जनता के बीच राष्ट्रवाद बनाम भय
जहाँ एक ओर पाकिस्तानी मीडिया “भारत के खिलाफ जिहाद” का माहौल बना रहा है, वहीं आम नागरिक इस संभावित टकराव से डरे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर कई नागरिक कह रहे हैं कि “हमें जंग नहीं, रोटी चाहिए।”
निष्कर्ष
दिल्ली धमाके के बाद उपजे हालातों ने भारत-पाक संबंधों को फिर से उस पुराने मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ विश्वास की जगह अविश्वास, और संवाद की जगह तनाव ने ले ली है।
लाहौर की ओर बढ़ती पाकिस्तानी सेना यह दर्शाती है कि डर कभी-कभी रणनीति बन जाता है। लेकिन सवाल अब भी वही है — क्या पाकिस्तान अपनी गलतियों से सबक लेगा, या एक बार फिर खौफ की राजनीति उसके भविष्य को निगल जाएगी?
