मुख्य बातें
- पाकिस्तानी विशेषज्ञ डॉ. खुर्रम अब्बास ने अपनी सरकार को भारत और चीन के आर्थिक विकास से सीखने की सलाह दी।
- उन्होंने विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत में 2011 से 2023 के बीच लगभग 49.6 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा किया।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 27.1% से घटकर 2.6% रह गई।
- खुर्रम अब्बास ने पाकिस्तान को गरीबी कम करने और नागरिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पड़ोसी देशों के अनुभवों से सीखने की बात कही।

भारत में गरीबी कम करने की प्रगति अब पड़ोसी पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बन गई है। इस्लामाबाद स्थित इंडिया स्टडी सेंटर के निदेशक डॉ. खुर्रम अब्बास ने पाकिस्तान की सरकार को भारत और चीन के आर्थिक अनुभवों से सीखने की सलाह दी है। उन्होंने विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने बीते वर्षों में गरीबी कम करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है।
डॉ. अब्बास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी टिप्पणी में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए। उन्होंने पाकिस्तान को भी अपने नागरिकों का जीवन स्तर सुधारने और गरीबी कम करने के लिए पड़ोसी देशों के अनुभवों से सीखने की जरूरत बताई।
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने क्या सलाह दी?
डॉ. खुर्रम अब्बास के अनुसार, भारत ने गरीबी घटाने के मामले में दुनिया के तेजी से प्रगति करने वाले देशों में जगह बनाई है। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट के आंकड़ों को सामने रखते हुए पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में भारत और चीन का उदाहरण भी दिया। अब्बास ने कहा कि पाकिस्तान को अपने दोनों पड़ोसी देशों से सीखना चाहिए, जिन्होंने मिलकर लगभग 1.249 अरब लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में योगदान दिया है। उन्होंने इसे मानवता के लगभग एक चौथाई हिस्से से जुड़ी बड़ी उपलब्धि बताया।
उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि आर्थिक विकास का मूल्यांकन केवल देश की अर्थव्यवस्था के आकार से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि विकास का लाभ आम नागरिकों तक कितना पहुंच रहा है।
विश्व बैंक के आंकड़ों में भारत की प्रगति
डॉ. अब्बास ने विश्व बैंक की पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ रिपोर्ट, अक्टूबर 2026 का हवाला दिया। उनके साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2011 में 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 तक घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई।
रिपोर्ट में गरीबी के अलग-अलग स्तरों को भी दर्शाया गया है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम आय वाले लोगों का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत हुआ। वहीं, बहुआयामी गरीबी का स्तर 53.8 प्रतिशत से कम होकर 15.5 प्रतिशत रह गया।
यहां अत्यधिक गरीबी की गणना प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा और 2021 की क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर बताई गई है। इसका अर्थ है कि आंकड़ों में केवल भारतीय मुद्रा में कमाई नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की खरीदने की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है।
पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह तुलना?
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता, महंगाई, वित्तीय दबाव और बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। इन परिस्थितियों में गरीबी कम करने को लेकर किसी पाकिस्तानी विशेषज्ञ की ओर से भारत का उदाहरण देना राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
भारत और पाकिस्तान की आर्थिक परिस्थितियां, जनसंख्या, नीतिगत ढांचे और विकास की चुनौतियां अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों देशों के आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय गरीबी मापने के तरीके और संबंधित समयावधि को समझना जरूरी है।
फिर भी, डॉ. अब्बास की टिप्पणी पाकिस्तान में आर्थिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है कि सरकार की प्राथमिकताओं में आम नागरिकों की आय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधारने को कितनी जगह मिल रही है।
भारत की गरीबी में आई कमी के आंकड़े आर्थिक प्रगति के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने रखते हैं। हालांकि, गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों का आकलन करते समय आंकड़ों की परिभाषा, उनकी गणना और उनके पीछे की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
FAQ’s
1. पाकिस्तानी विशेषज्ञ डॉ. खुर्रम अब्बास ने भारत को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत ने गरीबी कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पाकिस्तान को भारत और चीन के अनुभवों से सीखकर अपने नागरिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
2. विश्व बैंक के अनुसार भारत में कितने लोग गरीबी से बाहर आए?
डॉ. खुर्रम अब्बास की साझा की गई रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए।
3. भारत में अत्यधिक गरीबी की दर कितनी रह गई है?
उल्लेखित विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के आधार पर भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत हो गई।
4. भारत में बहुआयामी गरीबी में कितनी कमी आई?
स्रोत में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 53.8 प्रतिशत से घटकर 15.5 प्रतिशत रह गया। यह गरीबी के गैर-आय आधारित पहलुओं को भी ध्यान में रखता है।
5. डॉ. खुर्रम अब्बास किस संस्थान के निदेशक हैं?
डॉ. खुर्रम अब्बास इस्लामाबाद स्थित इंडिया स्टडी सेंटर (ISSI) के निदेशक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत की गरीबी कम करने की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
6. क्या भारत और पाकिस्तान की गरीबी के आंकड़ों की सीधी तुलना की जा सकती है?
सीधी तुलना के लिए दोनों देशों में गरीबी मापने की समान परिभाषा, अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा, आंकड़ों की समयावधि और क्रय शक्ति समता जैसे मानकों का इस्तेमाल जरूरी है। केवल अलग-अलग राष्ट्रीय गरीबी दरों को देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।






