तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में आयोजित इंटरनेशनल फोरम ऑन पीस एंड ट्रस्ट में दुनिया की नजरें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर टिकी हुई थीं। यह फोरम 30 वर्षों तक तुर्कमेनिस्तान की स्थायी तटस्थता की उपलब्धियों को मनाने के लिए आयोजित किया गया था। इसमें रूस, तुर्की और पाकिस्तान समेत कई देशों के नेताओं ने भाग लिया।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव और युद्ध के बीच यह फोरम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति स्थापना और भरोसा बहाली की दिशा में अहम माना जा रहा था। पुतिन, जो दुनिया को अपने नेतृत्व और सामरिक फैसलों से प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं, इस बार एक अनोखी चुनौती का सामना कर रहे थे। फोरम के दौरान उनका माइक्रोफोन काम नहीं कर रहा था और करीब 34 सेकंड तक वे बोलते रहे लेकिन कोई सुन नहीं पा रहा था। इस घटना ने उनके चेहरे पर गुस्सा और हताशा दोनों को स्पष्ट रूप से उभारा। पुतिन ने कई बार खुद माइक्रोफोन ठीक करने की कोशिश की और आसपास मदद की तलाश की, लेकिन उनकी परेशानी तत्काल हल नहीं हुई। बाद में एक सहायक ने उन्हें उपकरण का सही उपयोग बताया।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयिप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए करीब 40 मिनट इंतजार करना पड़ा। अधीर होकर शहबाज शरीफ ने सुरक्षा अधिकारियों को दरकिनार कर बैठक कक्ष में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन कुछ मिनट बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, और उपयोगकर्ताओं ने मजाकिया टिप्पणियों के माध्यम से इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।
फोरम के मुख्य विषय यूक्रेन युद्ध और शांति प्रक्रिया थे। पुतिन और एर्दोगन ने काला सागर में हालिया हमलों, ऊर्जा आपूर्ति, बंदरगाहों और शांति वार्ता की संभावनाओं पर चर्चा की। एर्दोगन ने कहा कि सीमित युद्धविराम और शांति वार्ता की मेजबानी के लिए तुर्की तैयार है। इस वार्ता के दौरान यूरोपीय संघ द्वारा रूसी संपत्तियों को फ्रीज करने और शांति वार्ता के संभावित प्रारूप पर भी चर्चा हुई।
यूक्रेन की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। दिसंबर 12-13 की रात रूस ने यूक्रेन पर 450 से अधिक ड्रोन और 30 मिसाइलों से हमला किया। इस हमले में मुख्य रूप से दक्षिणी और ओडेसा क्षेत्रों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया। बिजली और पानी की सप्लाई कई इलाकों में बाधित हुई। कुछ नागरिक घायल हुए और कई परिवार अंधेरे और ठंड में फंसे रहे। यह हमला रूस की पुरानी रणनीति के अनुरूप ठंड में ऊर्जा प्रणाली को निशाना बनाने की कोशिश थी, जिससे आम लोगों पर दबाव बढ़ाया जा सके।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट कहा कि रूस का उद्देश्य युद्ध खत्म करना नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि मॉस्को पर कड़ा दबाव बनाया जाए और शस्त्र सहायता एवं हवाई रक्षा प्रणाली प्रदान की जाए। उनके अनुसार, शांति प्रयास तभी सफल होंगे जब हमलावर पर प्रभावी दबाव डाला जाए।
ब्रिटेन और अमेरिका भी इस संकट में सक्रिय हैं। ब्रिटेन ने अटलांटिक बैस्टियन प्रोग्राम तैयार किया है, जिसमें रूसी पनडुब्बियों और युद्धपोतों को AI तकनीक के जरिए मॉनिटर और निशाना बनाया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य यूके को नौसैनिक युद्ध में अपरहैंड प्रदान करना और समुद्री केबलों, तेल और गैस पाइपलाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यूके को खतरा है कि रूस समुद्री केबलों को नुकसान पहुंचाकर देश की ऊर्जा और टेलीकम्युनिकेशन प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति और युद्ध की स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। पुतिन का माइक्रोफोन ड्रामा, शहबाज का इंतजार और रूस-यूक्रेन जंग के हालात ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नेताओं की मानवीय और अप्रत्याशित परेशानियों का असर हो सकता है। वैश्विक समुदाय इस फोरम और युद्ध पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
