रेबीज मट्ठा कांड ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में ऐसा डर पैदा कर दिया है, जिसने पूरे गांव को सतर्क और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया। एक शादी समारोह, खुशियों का माहौल, मेहमानों की भीड़ और बारातियों के स्वागत के लिए परोसा गया मट्ठा—इन सबके बीच किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यही मट्ठा अगले ही दिन पूरे गांव में भय और अफरा-तफरी की वजह बन जाएगा। जब यह खुलासा हुआ कि जिस गाय के दूध से मट्ठा तैयार किया गया था, उसे कुछ दिन पहले एक पागल कुत्ते ने काट लिया था, तब लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

छिंदवाड़ा शहर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित भैंसादंड गांव में हुई यह घटना अब केवल एक स्थानीय खबर नहीं रही, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता, पशुपालन में लापरवाही और रेबीज जैसे गंभीर संक्रमण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। अब तक 92 से अधिक लोगों को एहतियातन एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं और स्वास्थ्य विभाग लगातार उन लोगों की तलाश कर रहा है जिन्होंने उस शादी में मट्ठा पिया था।
यह मामला सिर्फ एक गाय, एक कुत्ते या एक शादी तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि क्या हम पशुओं की बीमारी को गंभीरता से लेते हैं? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिक जानकारी पर्याप्त रूप से पहुंच रही है? और क्या एक छोटी सी लापरवाही पूरे समाज को खतरे में डाल सकती है?
रेबीज मट्ठा कांड कैसे बना पूरे गांव में दहशत की वजह
भैंसादंड गांव में शादी का माहौल था। रिश्तेदार आए हुए थे, बारात की तैयारी थी और ग्रामीण परंपरा के अनुसार मेहमानों के स्वागत में मट्ठा भी परोसा गया। गर्मी के मौसम में मट्ठा सिर्फ पेय नहीं, बल्कि आतिथ्य का हिस्सा माना जाता है। किसी ने भी यह नहीं सोचा कि यही मट्ठा बाद में स्वास्थ्य संकट बन जाएगा।
जानकारी के अनुसार जिस गाय का दूध उपयोग में लाया गया, उसे लगभग एक सप्ताह पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआत में इस घटना को सामान्य माना गया। गांवों में पशुओं को कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं और कई बार लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
परिवार ने गाय का दूध निकालना जारी रखा। किसी पशु चिकित्सक से तत्काल परामर्श नहीं लिया गया। न ही दूध के उपयोग को रोका गया। इसी दूध से मट्ठा तैयार किया गया और शादी में आए लोगों को परोस दिया गया।
कुछ दिनों बाद गाय की हालत अचानक बिगड़ गई। उसकी तबीयत नाजुक होने लगी और गांव में चर्चा फैलने लगी कि उसे जिस कुत्ते ने काटा था, वह संभवतः पागल था। यहीं से रेबीज मट्ठा कांड ने भयावह रूप ले लिया।
गाय की हालत बिगड़ी तो खुला पूरा मामला
गांव में लोग तब चौंके जब गाय का व्यवहार असामान्य दिखने लगा। उसकी कमजोरी बढ़ गई, बेचैनी साफ दिख रही थी और परिजनों को स्थिति गंभीर लगने लगी। पशु की बिगड़ती हालत ने लोगों को पुराने घटनाक्रम की याद दिलाई—उसे कुत्ते ने काटा था।
जैसे ही यह जानकारी फैलनी शुरू हुई कि उसी गाय का दूध बारात में उपयोग हुआ था, पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। जिन लोगों ने मट्ठा पिया था, वे घबरा गए। परिवारों ने एक-दूसरे को फोन करना शुरू किया। बारात में शामिल मेहमानों की सूची खोजी जाने लगी।
यह सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, मानसिक तनाव का भी मामला बन गया। लोग डरने लगे कि कहीं उन्हें रेबीज संक्रमण का खतरा तो नहीं।
रेबीज मट्ठा कांड में स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय
मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में मेडिकल कैंप लगाया गया। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम गांव पहुंची और प्राथमिक जांच शुरू की गई।
जिन लोगों ने मट्ठा पिया था, उनकी पहचान की जाने लगी। लोगों को घर-घर सूचना देकर बुलाया गया। एहतियात के तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाने लगे।
अब तक 92 से अधिक लोगों को इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त डोज मंगवाई गई। शुरुआत में सीमित उपलब्धता के कारण कुछ लोगों को इंतजार भी करना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य स्पष्ट था—कोई भी व्यक्ति छूटना नहीं चाहिए।
रेबीज क्या है और क्यों इतना खतरनाक माना जाता है
रेबीज एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने से फैलता है। कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य स्तनधारी जानवर इसके वाहक हो सकते हैं। यदि संक्रमित पशु समय पर उपचार न पाए और उसके संपर्क में आए व्यक्ति सावधानी न बरते, तो यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि एक बार लक्षण विकसित होने के बाद रेबीज का इलाज लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए रोकथाम ही सबसे बड़ा उपाय है।
हालांकि केवल दूध पीने से संक्रमण का जोखिम अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन संदिग्ध स्थिति में एहतियात बेहद जरूरी माना जाता है। यही कारण है कि रेबीज मट्ठा कांड में स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत इंजेक्शन लगाने का फैसला किया।
ग्रामीण लापरवाही कैसे बनती है बड़ा खतरा
रेबीज मट्ठा कांड ने एक बार फिर यह दिखाया कि ग्रामीण इलाकों में पशु स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई परिवार पशु को परिवार का हिस्सा मानते हैं, लेकिन बीमारी के संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते।
कुत्ते द्वारा काटे जाने के बाद तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए था। यदि समय पर जांच होती, तो शायद दूध का उपयोग रोका जा सकता था और यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
कई बार लोग आर्थिक कारणों से भी दूध फेंकने से बचते हैं। उन्हें लगता है कि नुकसान हो जाएगा। लेकिन यही छोटी बचत बाद में बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।
गांव में डर और सामाजिक असर
रेबीज मट्ठा कांड के बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया। शादी की खुशी की जगह चिंता ने ले ली। लोग एक-दूसरे से पूछने लगे कि किसने कितना मट्ठा पिया था। जिन परिवारों के सदस्य बाहर से आए थे, उन्हें भी सूचना दी गई।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष चिंता देखी गई। कुछ लोग तुरंत अस्पताल पहुंचे, कुछ ने निजी डॉक्टरों से सलाह ली। कई परिवारों ने पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना शुरू किया।
यह घटना सामाजिक रूप से भी एक सबक बन गई है। अब गांव में लोग पशु काटने, बीमारी और दूध उपयोग जैसे मामलों में अधिक सतर्क नजर आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की अपील और प्रशासन की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट अपील की है कि जिन लोगों ने मट्ठा पिया है, वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। बिना डर छिपाने के बजाय जांच कराना जरूरी है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी पशु को कुत्ता या अन्य संदिग्ध जानवर काटे, तो तुरंत पशु चिकित्सक से उपचार कराया जाए। ऐसे पशु के दूध या अन्य उत्पादों का उपयोग बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
प्रशासन ने भी ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और केवल चिकित्सा सलाह पर भरोसा करने की बात कही है।
