एक छक्का जब हवा को चीरता हुआ आसमान में उठता है, तो वह केवल गेंद की यात्रा नहीं होती, बल्कि वह एक खिलाड़ी के व्यक्तित्व, उसकी तैयारी, उसके साहस और उसके दृष्टिकोण का परिचय भी होता है। क्रिकेट के विशाल संसार में ऐसे क्षण संख्या में भले कम हों, लेकिन उनका प्रभाव समय से परे जाकर इतिहास में दर्ज हो जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक पल देखने को मिला जब भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे मुकाबले में शाहिद अफरीदी के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह रिकॉर्ड था वनडे इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का, जिसे अफरीदी ने कई वर्षों तक बड़ी शान से संभाले रखा था।

लेकिन इस घटना का सबसे खूबसूरत पक्ष वह प्रतिक्रिया थी, जो शाहिद अफरीदी ने स्वयं इस रिकॉर्ड टूटने पर दी। खेल भावना का ऐसा उदाहरण आज के समय में दुर्लभ है, जब आंकड़ों और प्रतिस्पर्धा की गर्मी के बीच खिलाडिय़ों की व्यक्तिगत भावनाएँ अक्सर पीछे रह जाती हैं। अफरीदी ने जिस सरलता और खुशी के साथ रोहित शर्मा की उपलब्धि का स्वागत किया, वह क्रिकेट प्रशंसकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।
अफरीदी की भाषा में सम्मान और भावनाओं का प्रवाह
जब एक दिग्गज खिलाड़ी यह कहता है कि उसे खुशी है कि उसका रिकॉर्ड उसी खिलाड़ी ने तोड़ा, जिसे वह पसंद करता है, तो यह कथन केवल शब्दों का समूह नहीं रहता, बल्कि एक खिलाड़ी के दिल से निकली वह सच्ची प्रशंसा बन जाता है, जिसमें ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं होता। अफरीदी ने कहा कि वे लंबे समय से रोहित की बल्लेबाजी शैली, उनके स्वभाव और उनकी समझ को पसंद करते रहे हैं।
साल 2008 में, जब अफरीदी और रोहित शर्मा पहली बार इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान एक ही टीम में शामिल हुए, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे दोनों किसी बड़े रिकॉर्ड के दो अलग सिरों पर खड़े होंगे। डेक्कन चार्जर्स के लिए खेलते हुए प्रैक्टिस सत्रों में अफरीदी अक्सर रोहित को ध्यान से देखते थे। उन्होंने बताया कि तब भी उन्हें महसूस हो गया था कि यह युवा बल्लेबाज भारतीय क्रिकेट के भविष्य में असाधारण भूमिका निभाएगा।
वे याद करते हैं कि रोहित की बल्लेबाजी में एक स्वाभाविक प्रवाह था। गेंद को पढ़ने की उनकी क्षमता, टाइमिंग का असाधारण तालमेल और मैदान के हर हिस्से में शॉट खेलने की कला उस समय भी दिखाई देती थी। अफरीदी ने स्वीकार किया कि रोहित में उन्हें वह परिपक्वता और प्रतिभा दिखती थी, जिसकी वजह से यह तय सा था कि भविष्य में वह किसी भी चुनौती के आगे खड़े रहेंगे।
रिकॉर्ड जो बनते ही इसलिए हैं कि एक दिन टूट जाएं
अफरीदी ने इस अवसर पर अपने पुराने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वनडे इतिहास का सबसे तेज शतक लगाने का उनका रिकॉर्ड लगभग अठारह साल तक कायम रहा। यह रिकॉर्ड कई पीढ़ियों के बल्लेबाजों ने देखा और सराहा, लेकिन वे स्वीकार करते हैं कि रिकॉर्ड अपने आप में स्थायी नहीं होते। वे खेल की परंपराओं का हिस्सा हैं और खेल जैसे-जैसे विकसित होता है, रिकॉर्ड भी बदलते जाते हैं।
अफरीदी बताते हैं कि उनके लिए यह सबसे बड़ी बात है कि रोहित शर्मा जैसे शांत, अनुभवी और विनम्र खिलाड़ी ने उनके रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। उनकी भाषा में कहीं भी प्रतिस्पर्धा की कठोरता नहीं थी, बल्कि वह एक अनुभवी खिलाड़ी का अनुभव था, जो यह समझ चुका है कि खेल में महानता केवल रिकॉर्ड से नहीं आती, बल्कि खिलाड़ी के व्यक्तित्व और खेल भावना से भी आती है।
रोहित शर्मा: आधुनिक क्रिकेट का सिक्सर किंग
रायपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे ने रोहित शर्मा के करियर में एक और स्वर्णिम पन्ना जोड़ दिया। उन्होंने 279 मैचों में ही वह मुकाम छू लिया, जहां तक अफरीदी 398 मुकाबलों में पहुंचे थे। यह केवल संख्याओं का अंतर नहीं है, बल्कि यह उस निरंतरता और कौशल का प्रतीक है, जिसके साथ रोहित ने खेल को जिया है।
रोहित उन कुछ बल्लेबाजों में से हैं, जो केवल पावर हिटर नहीं, बल्कि टाइमिंग के बादशाह भी माने जाते हैं। उनके छक्कों में केवल बल नहीं होता, बल्कि वह सौंदर्य भी होता है, जो एक बल्लेबाज को असाधारण बनाता है। शायद यही कारण है कि उनकी बल्लेबाजी न केवल भारतीय प्रशंसकों को, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठे क्रिकेट प्रेमियों को आकर्षित करती है।
रोहित और विराट: भारतीय क्रिकेट की आज और आने वाले कल की रीढ़
शाहिद अफरीदी ने बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम को रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों को 2027 वर्ल्ड कप तक खेलते रहने देना चाहिए। अफरीदी के अनुसार, दोनों खिलाड़ी बल्लेबाजी लाइन-अप की वह नींव हैं, जिसके ऊपर आने वाले वर्षों की सफलताएँ टिकी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत कम अनुभवी टीमों के खिलाफ खेलता है, तब टीम मैनेजमेंट को इन दोनों खिलाड़ियों को आराम देने का विकल्प अपनाना चाहिए, जिससे नए खिलाड़ियों को मौका भी मिले और रोहित-विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी लंबे समय तक फिट बने रहें।
यह बात सच है कि दोनों खिलाड़ियों ने टेस्ट और टी20 फॉर्मेट से विदाई ले ली है, लेकिन वनडे में उनका अनुभव अब भी टीम के लिए अमूल्य है। हाल में खेली गई दो वनडे सीरीज में दोनों खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बने, जो यह साबित करता है कि उनकी क्षमताओं में उम्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
