देश की राजधानी में सर्दियों की हल्की धूप के बीच संसद भवन के बाहर एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी। संसद परिसर के भीतर और उसके आसपास आमतौर पर कठोर नियम लागू रहते हैं, विशेषकर आचरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय का संसद भवन के बाहर ई सिगरेट पीते दिखाई देना एक नई राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। यह कोई साधारण घटना नहीं थी, क्योंकि ई सिगरेट पर साल 2019 से ही देश में प्रतिबंध लागू है। इस प्रतिबंध के बावजूद संसद परिसर में एक सांसद का इसे उपयोग करते दिखना विपक्ष और सत्ता पक्ष के लिए चर्चा का विषय बन गया।

घटना उस समय सामने आई जब केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और गजेंद्र सिंह शेखावत ने सौगत रॉय को हल्के धुएं के बादल के बीच ई सिगरेट का कश लगाते हुए देखा। दोनों नेताओं ने न केवल तुरंत आपत्ति जताई, बल्कि इसे संसद की मर्यादा से जोड़ते हुए गंभीर मामला बताया। जिस समय यह वाकया हुआ, पास ही मीडिया और अन्य सांसद भी मौजूद थे, जिससे यह दृश्य तेजी से चर्चा और फिर विवाद का हिस्सा बन गया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सौगत रॉय को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमभरा है और इस तरह की गतिविधि संसद जैसे पवित्र स्थान में कतई स्वीकार्य नहीं। गजेंद्र सिंह शेखावत का कहना था कि संसद परिसर वह जगह है जहाँ देश के कानून बनाए जाते हैं, जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और यहाँ किसी भी प्रकार का नियम उल्लंघन उदाहरण पेश नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ई सिगरेट पर प्रतिबंध है और इसकी अनदेखी जनता के बीच गलत संदेश भेज सकती है।
इसके बाद गिरिराज सिंह ने भी घटना पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले एक सांसद ने ई सिगरेट को लेकर सदन में ही मुद्दा उठाया था और तब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लागू करने की सिफारिश की थी। गिरिराज सिंह के मुताबिक जब देश के नागरिकों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है तो सांसदों को भी उसी अनुशासन के मानकों के अनुरूप आचरण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना हर सांसद का कर्तव्य है और इस प्रकार के व्यवहार से सदन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद पत्रकारों ने सौगत रॉय को रोका और उनसे उनकी प्रतिक्रिया मांगी। शुरुआत में उन्होंने इस विषय पर बोलने से परहेज किया और कहा कि वे यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे कि किसने शिकायत की और किसने धुआं देखा। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो स्पीकर को इसकी जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस मामले को राजनीतिक रंग न देने की अपील की। हालांकि कुछ ही देर बाद सौगत रॉय ने एक और बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि बिल्डिंग के अंदर धूम्रपान निषेध है लेकिन बाहर वे ऐसा कर सकते हैं। इस बयान से विवाद और गहरा गया क्योंकि सवाल केवल धूम्रपान का नहीं बल्कि ई सिगरेट के उपयोग का था, जो देश में प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल है।
कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि अगर आम नागरिकों पर ई सिगरेट उपयोग करने पर कार्रवाई होती है, तो संसद परिसर में इससे अलग मानक क्यों होने चाहिए। वहीं, टीएमसी समर्थक इस घटना को बढ़ाचढ़ाकर पेश किए जाने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत व्यवहार था जिसे अनावश्यक राजनीति का रूप दिया जा रहा है। हालांकि घटना को लेकर राजनीतिक टकराव और अधिक तेज हो गया जब संसद के प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने स्पीकर से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या सदन में ई सिगरेट का उपयोग किसी भी रूप में अनुमत है।
स्पीकर ओम बिरला ने इस प्रश्न का सख्त जवाब देते हुए कहा कि संसद के किसी भी नियम में ऐसी कोई अनुमति नहीं है और किसी भी सांसद को सदन के भीतर या परिसर में धूम्रपान करने की कोई छूट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मामले में कोई लिखित शिकायत मिलती है तो उस पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी। स्पीकर का यह बयान इस विवाद को और गंभीर बना गया है क्योंकि अब मामला केवल व्यक्तिगत आचरण नहीं बल्कि नियम और आचार संहिता के दायरे में भी आ चुका है।
इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ का कहना है कि संसद परिसर में ऐसे दृश्य लोग उम्मीद नहीं करते। वहीं कुछ नेता इसे छोटा मामला बताते हुए कहते हैं कि इसे अनावश्यक रूप से बड़ा बनाया जा रहा है। मगर ई सिगरेट पर प्रतिबंध और संसद की मर्यादा के बीच खड़ा यह विवाद फिलहाल शांत होने का नाम नहीं ले रहा।
संसद परिसर हमेशा से अनुशासन, मर्यादा और राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि जब भी कोई सांसद इस आचार संहिता से हटकर कुछ करते हुए नजर आता है तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ई सिगरेट प्रतिबंध का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इससे दूर रखना, स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना और निकोटिन आधारित उत्पादों के उपयोग को रोकना है। ऐसे में जब जनता अपने प्रतिनिधियों को इस नियम का उल्लंघन करते देखती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब गेंद स्पीकर ओम बिरला के पाले में है। लिखित शिकायत मिलने पर इस मामले की जांच और इसके आधार पर कार्रवाई तय होगी। यह विवाद आने वाले कुछ दिनों तक राजनीतिक बहसों, टीवी डिबेट और सोशल मीडिया चर्चाओं में बना रहेगा। हालांकि सौगत रॉय पहले की तरह ही इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी से बचते दिखे और उन्होंने मामले को राजनीतिक रूप देने की शिकायत की।
आगे आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मुद्दा सिर्फ चर्चा तक सीमित रहता है या इसके चलते संसद में कोई औपचारिक कदम भी उठाए जाते हैं। फिलहाल इतना निश्चित है कि संसद के इतिहास में यह घटना एक और दिलचस्प अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है जहाँ एक साधारण धुएं के गुबार ने राजनीतिक वातावरण को धुंधला कर दिया।
