सीहोर जिले के बिलकिसगंज थाना क्षेत्र में हाल ही में धर्मांतरण का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की नींद उड़ा दी है। ग्राम वीरपुर डैम और आसपास के गांवों में आरोप है कि कुछ लोग ग्रामीणों को लालच देकर और आर्थिक प्रलोभन दिखाकर जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर रहे थे। इन लोगों के पीछे एक संगठित गिरोह का हाथ बताया जा रहा है, जिसने नौकरी और पैसे का वादा कर स्थानीय लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास किया।

सूचना के अनुसार, यह गिरोह नियमित रूप से प्रार्थना सभाओं का आयोजन करता था। रात के अंधेरे में ग्रामीणों को विशेष सभाओं में बुलाया जाता और उन्हें आर्थिक लाभ और नौकरी का लालच दिया जाता। इस दौरान ईसाई धर्म का प्रचार किया जाता और लोगों को उनके मौजूदा धर्म से हटाने का दबाव डाला जाता। इन सभाओं में बाइबल, ईसा मसीह की तस्वीरें और अन्य धार्मिक प्रतीक दिखाकर प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।
स्थानीय हिंदू संगठन के सदस्यों को इस गतिविधि की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर गिरोह के कार्यों को रोकने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी में स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका देखी गई, जिसने गिरोह के मनोबल को तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने भी पुलिस से लिखित शिकायत की, जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों से आरोपी लगातार उनके गांवों में आकर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाल रहे थे। शिकायत में लखन बारेला, सीताराम बारेला, रमेश बारेला और रायसिंह बारेला ने विस्तार से जानकारी दी कि कैसे रेम सिंह के घर पर रात में विशेष सभाओं का आयोजन किया जाता था और लोगों को आर्थिक और नौकरी का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था।
9 दिसंबर की रात, जब आरोपी फिर से ग्रामीणों को सभा में बुलाकर दबाव डाल रहे थे, तो ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए 112 डायल किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गिरोह के तीन सदस्यों को तत्काल हिरासत में लिया और बाकी की गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू किया। छानबीन के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य न केवल ग्रामीणों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, बल्कि उनके बीच भय और भ्रम का माहौल भी बनाए रख रहे थे।
पुलिस और प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। छानबीन में यह पता चला कि गिरोह ने कई गांवों में इसी तरह की गतिविधियां की हैं और इसे लेकर व्यापक जांच की जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस गिरोह के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है।
विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता इस घटना को ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते धार्मिक दबाव और सामाजिक असुरक्षा के संकेत के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस तरह के मामलों में सजग रहना चाहिए ताकि ग्रामीण समाज में भय, भ्रम और धार्मिक दबाव के मामले नियंत्रित किए जा सकें।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय समुदाय, पुलिस और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भूमिका किसी भी गिरोह या अपराधी गतिविधि को रोकने में महत्वपूर्ण होती है। ग्रामीणों की सूझबूझ और पुलिस की तत्परता ने इस गिरोह के प्रयासों को विफल कर दिया और कानून की ताकत का उदाहरण पेश किया।
