राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि भर नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा का उत्सव है जिसने भारत के युवाओं को आत्मबल, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाया। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इस वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने शिक्षा, कला और राष्ट्रचेतना को एक साथ जोड़ दिया। भारत भारती आवासीय सीबीएसई विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद जयंती पर 200 वर्ग फीट में विशाल रंगोली बनाकर अपनी रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का परिचय दिया।

यह रंगोली केवल रंगों का संयोजन नहीं थी, बल्कि यह विचारों की अभिव्यक्ति थी। इसे बनाने में 103 किलोग्राम विभिन्न रंगों का उपयोग किया गया, जो अपने आप में एक अद्भुत प्रयास माना जा रहा है। विद्यालय परिसर में जब यह रंगोली आकार ले रही थी, तब वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति उस दृश्य से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। यह आयोजन यह दर्शाता है कि आज का युवा केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
स्वामी विवेकानंद के विचारों को रंगों के माध्यम से प्रस्तुत करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। विद्यार्थियों ने इस चुनौती को पूरे आत्मविश्वास और समर्पण के साथ स्वीकार किया। रंगोली में स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व, उनके तेजस्वी चेहरे, आत्मविश्वास से भरी दृष्टि और ओजस्वी विचारों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाया गया। रंगों के चयन से लेकर आकृति की बारीकियों तक, हर स्तर पर छात्रों की मेहनत साफ झलक रही थी।
रंगोली निर्माण की प्रक्रिया कई दिनों की तैयारी का परिणाम थी। छात्रों ने पहले कागज पर डिज़ाइन तैयार किए, फिर उन्हें बड़े आकार में जमीन पर उतारने की योजना बनाई। रंगों की मात्रा, उनके मिश्रण और उपयोग की तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया ताकि रंगोली लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। 103 किलोग्राम रंगों का उपयोग करना केवल शारीरिक श्रम नहीं था, बल्कि इसमें अनुशासन, सामूहिक समन्वय और धैर्य की भी आवश्यकता थी।
विद्यालय प्रांगण में जैसे-जैसे रंगोली आकार लेती गई, वैसे-वैसे वहां एक उत्सव जैसा वातावरण बन गया। शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय नागरिक भी इस प्रक्रिया को देखने पहुंचे। सभी ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना की और इसे युवाओं के भीतर छिपी रचनात्मक शक्ति का प्रमाण बताया। कई लोगों ने इसे केवल एक कला गतिविधि नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक सामाजिक संदेश के रूप में देखा।
स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन का मूल मंत्र था कि युवा स्वयं पर विश्वास करें और समाज के लिए कार्य करें। इस रंगोली के माध्यम से छात्रों ने उसी विचार को जीवंत रूप दिया। यह आयोजन छात्रों को केवल कला तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें इतिहास, दर्शन और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से भी जोड़ता है। यही कारण है कि यह रंगोली केवल देखने योग्य नहीं, बल्कि महसूस करने योग्य अनुभव बन गई।
राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना है, और इस आयोजन ने उस उद्देश्य को पूर्ण रूप से सार्थक किया। आज के समय में जब युवा वर्ग तेजी से बदलती जीवनशैली और तकनीकी दबावों से जूझ रहा है, ऐसे आयोजन उन्हें आत्ममंथन और सकारात्मक सोच की ओर ले जाते हैं। रंगोली बनाते समय छात्रों ने एक-दूसरे के साथ सहयोग किया, जिम्मेदारियां साझा कीं और सामूहिक सफलता का महत्व समझा।
इस आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियां छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब छात्र किसी विषय को केवल पढ़ते नहीं, बल्कि उसे अनुभव करते हैं, तब वह उनके जीवन का हिस्सा बन जाता है। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा को इस प्रकार प्रस्तुत करना निश्चित रूप से छात्रों के मन पर गहरी छाप छोड़ने वाला अनुभव रहा।
विद्यालय प्रबंधन द्वारा इस आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। शिक्षकों ने छात्रों को केवल निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि स्वयं भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह सहभागिता छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी और उन्होंने पूरे मनोयोग से कार्य को पूर्ण किया।
स्थानीय स्तर पर इस रंगोली ने काफी चर्चा बटोरी। कई लोगों ने इसे जिले में अब तक की सबसे बड़ी और अनोखी रंगोली बताया। यह आयोजन यह संदेश देता है कि छोटे शहरों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यदि सही मंच और अवसर मिले, तो यहां के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
रंगोली में प्रयुक्त रंगों का संयोजन न केवल सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक था, बल्कि उसमें गहराई भी थी। केसरिया, नीला, सफेद और अन्य रंगों का संतुलन भारत की सांस्कृतिक पहचान और स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रतीक बना। हर रंग का अपना अर्थ था, जिसे छात्रों ने सोच-समझकर चुना।
इस आयोजन के दौरान छात्रों के चेहरे पर जो उत्साह और गर्व दिखाई दे रहा था, वह शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उन्होंने महसूस किया कि उनका कार्य केवल एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी संदेश छोड़ने वाला प्रयास है। यही भावना उन्हें भविष्य में भी समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा देगी।
इस रंगोली के माध्यम से यह भी स्पष्ट हुआ कि युवाओं में यदि सही दिशा दी जाए, तो वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगा सकते हैं। यह आयोजन केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर किया कि युवाओं की शक्ति को किस तरह सही दिशा दी जा सकती है।
बैतूल में बना यह दृश्य आने वाले समय में भी याद किया जाएगा। यह रंगोली केवल जमीन पर उकेरी गई आकृति नहीं थी, बल्कि यह युवाओं के सपनों, विचारों और संकल्पों का प्रतीक थी। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर इस तरह का आयोजन यह साबित करता है कि उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि युवा यदि चाहें, तो वे कला के माध्यम से भी समाज को दिशा दे सकते हैं। रंगों से बनी यह विशाल कृति आने वाले समय में अन्य विद्यालयों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। बैतूल के छात्रों ने यह दिखा दिया कि रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती, बस उसे सही मंच और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।
