मुख्य बातें
- ब्रिटेन के ‘Be Ready’ अभियान में नागरिकों को कम से कम 72 घंटे की जरूरतों के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
- जापान में भूकंप और माउंट फूजी में संभावित ज्वालामुखी गतिविधि जैसी आपदाओं को ध्यान में रखकर तीन से सात दिन की घरेलू तैयारी पर जोर दिया गया है।
- अमेरिका के रक्षा विभाग से जुड़ी FORTRESS पहल के तहत सैन्य ठिकानों को लंबे आपातकाल में जरूरी सेवाएं जारी रखने योग्य बनाने का प्रस्ताव बताया गया है।
- इन तैयारियों को दुनिया में आसन्न युद्ध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्राकृतिक आपदाएं, साइबर हमले और जरूरी सेवाओं में बाधा भी इनके पीछे संभावित कारण हैं।

ब्रिटेन और जापान में नागरिकों से घरों में कई दिनों का भोजन, पानी और जरूरी सामान रखने की अपील ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ब्रिटेन का ‘Be Ready’ अभियान कम से कम 72 घंटे की जरूरतों के लिए तैयारी करने पर जोर देता है, जबकि जापान में परिवारों को तीन से सात दिन तक काम आने वाला सामान रखने की सलाह दिए जाने की खबर है। अमेरिका में सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक जरूरी सुविधाएं बनाए रखने योग्य बनाने की पहल की चर्चा भी सामने आई है।
तीनों देशों की इन तैयारियों को एक साथ देखने पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकारें किसी बड़े युद्ध की आशंका में नागरिकों और सैन्य ठिकानों को तैयार कर रही हैं? लेकिन उपलब्ध जानकारी से दुनिया में आसन्न युद्ध का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इन कदमों के पीछे भूकंप, ज्वालामुखी, बिजली-पानी जैसी सेवाओं में व्यवधान, साइबर हमले और सैन्य सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग जोखिम भी हैं।
ब्रिटेन का Be Ready अभियान क्या है?
ब्रिटेन में सरकार ने नागरिकों को ऐसी स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी है, जिसमें किसी आपातकाल के बाद राहत और बचाव दल को प्रभावित इलाके तक पहुंचने में समय लग सकता है। अभियान के तहत लोगों से कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिन तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकने की तैयारी रखने को कहा गया है।
दिए गए विवरण के अनुसार, इस तैयारी में प्रति व्यक्ति लगभग नौ लीटर पानी, जरूरी भोजन, प्राथमिक उपचार की सामग्री, कंबल, स्वच्छता से जुड़े सामान, टॉर्च, बैटरी और कुछ नकदी रखने की सलाह शामिल है। पहचान पत्रों की प्रतियां सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी इस संदर्भ में चेतावनी दी है कि विरोधी देशों के हमले रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं और बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं। इसका अर्थ है कि सरकार की चिंता केवल पारंपरिक सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है। बिजली, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं का बाधित होना भी राष्ट्रीय संकट पैदा कर सकता है।
जापान में सात दिन की तैयारी क्यों?
जापान में आपदा प्रबंधन की तैयारी का बड़ा कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है। देश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और वहां सुनामी तथा ज्वालामुखी गतिविधियों का जोखिम भी बना रहता है। माउंट फूजी में संभावित ज्वालामुखी विस्फोट जैसी परिस्थितियों के लिए तैयारी करना वहां की आपदा योजना का हिस्सा है।
दिए गए समाचार विवरण के मुताबिक, जापान सरकार लोगों को कम से कम तीन दिन का भोजन, पीने का पानी और शौचालय से जुड़ी जरूरी सामग्री घर में रखने की सलाह देने जा रही है। बेहतर तैयारी के लिए एक सप्ताह तक काम आने वाला सामान रखने की बात भी कही गई है। प्रति व्यक्ति रोजाना करीब तीन लीटर पानी रखने की सलाह का भी उल्लेख है।
यह तैयारी केवल भोजन और पानी तक सीमित नहीं है। बड़े भूकंप या किसी अन्य आपदा के बाद सीवर व्यवस्था, जलापूर्ति और सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए पोर्टेबल टॉयलेट या टॉयलेट बैग जैसे सामान भी उपयोगी हो सकते हैं। आपदा के शुरुआती दिनों में राहत सामग्री पहुंचने में देरी हो तो घरों में उपलब्ध जरूरी सामान परिवारों को तत्काल सहायता पर निर्भर रहने से बचा सकता है।
अमेरिका के सैन्य ठिकानों की 90 दिन की योजना
अमेरिका में चर्चा का एक अलग पहलू सैन्य ठिकानों की आपातकालीन आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन की FORTRESS नामक प्रस्तावित पहल का उद्देश्य प्रमुख सैन्य ठिकानों को लंबे संकट के दौरान भी जरूरी कामकाज जारी रखने में सक्षम बनाना है।
इस योजना के तहत बिजली के साथ-साथ पानी, ईंधन, संचार और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर बताया गया है। प्रस्ताव में सैन्य ठिकानों को कम से कम 90 दिनों तक बाहरी आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में काम जारी रखने योग्य बनाने की बात कही गई है।
यह नागरिकों के लिए राशन जमा करने की सलाह से अलग व्यवस्था है। सैन्य ठिकानों की तैयारी का संबंध रक्षा संचालन और रणनीतिक निरंतरता से है। हालांकि, किसी प्रस्ताव या योजना का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी निश्चित युद्ध की तारीख या योजना तय हो चुकी है।
युद्ध की आशंकाओं को हवा क्यों मिल रही है?
दुनिया के कई क्षेत्रों में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऐसी तैयारियों को सैन्य खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, रूस और पश्चिमी देशों के संबंधों में खिंचाव तथा ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच रणनीतिक चिंताएं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख मुद्दे हैं।
दिए गए समाचार में अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई और खाड़ी देशों को तैयार रहने के कथित संदेशों का भी उल्लेख है। लेकिन इन दावों को किसी आसन्न हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। इसी तरह रूस की ओर से ब्रिटेन पर हमले या चीन की ओर से ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की आशंका को भी निश्चित घटना की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जापान के लिए ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष का असर उसके आसपास के समुद्री मार्गों और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिर भी जापान में घरेलू आपदा तैयारी की जरूरत को केवल चीन से संभावित संघर्ष के नजरिये से समझना अधूरा होगा।
साइबर हमले और बुनियादी ढांचे का जोखिम
आधुनिक संकट केवल मिसाइल या सैन्य हमले से पैदा नहीं होते। बिजली ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क, बैंकिंग व्यवस्था, जलापूर्ति और परिवहन प्रणालियां डिजिटल तकनीक पर निर्भर हैं। इन प्रणालियों पर साइबर हमला या तकनीकी बाधा आने से आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
किसी बड़े साइबर हमले के दौरान भुगतान सेवाएं, सरकारी संचार और जरूरी आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो सकती हैं। इसी तरह प्राकृतिक आपदा के बाद बिजली और मोबाइल नेटवर्क लंबे समय तक बंद रह सकते हैं। इसलिए नागरिकों को कुछ दिनों की बुनियादी तैयारी रखने की सलाह देना व्यापक आपदा प्रबंधन का हिस्सा है।
क्या भारत को भी ऐसी तैयारी करनी चाहिए?
भारत में भी भूकंप, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन और शहरी क्षेत्रों में अचानक आने वाली आपदाओं का खतरा अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद है। किसी आपदा के दौरान सड़कें बंद हो सकती हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति रुक सकती है या राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में समय लग सकता है।
इसलिए भारतीय परिवारों के लिए भी घर में पीने का पानी, कुछ दिनों का टिकाऊ भोजन, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, प्राथमिक उपचार किट और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षित प्रतियां रखना व्यावहारिक कदम है। परिवार के सदस्यों को आपातकालीन संपर्क नंबर और मिलने की वैकल्पिक जगह की जानकारी भी होनी चाहिए।
ब्रिटेन, जापान और अमेरिका की तैयारियों का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह नहीं है कि दुनिया निश्चित रूप से किसी महायुद्ध की ओर बढ़ रही है। असल बात यह है कि सरकारें अब आपदा, युद्ध, साइबर हमले और आपूर्ति बाधित होने जैसी अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी को जरूरी मान रही हैं। नागरिकों के लिए भी घबराने के बजाय जोखिम को समझना और सामान्य आपातकालीन तैयारी रखना अधिक उपयोगी है।
FAQ’s
1. ब्रिटेन में 72 घंटे का आपातकालीन सामान रखने की सलाह क्यों दी गई है?
आपातकाल के बाद राहत और बचाव सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में समय लग सकता है। इस दौरान परिवारों को भोजन, पानी और प्राथमिक जरूरतों के लिए तत्काल दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े, इसलिए तीन दिन की तैयारी की सलाह दी गई है। यह व्यवस्था युद्ध के अलावा प्राकृतिक आपदा और जरूरी सेवाओं में बाधा जैसी स्थितियों में भी उपयोगी है।
2. जापान में सात दिन का राशन रखने की सलाह का क्या कारण है?
जापान भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी गतिविधियों के जोखिम वाले क्षेत्र में है। बड़ी आपदा के बाद सड़कें, जलापूर्ति और शौचालय व्यवस्था प्रभावित हो सकती हैं। तीन दिन का सामान न्यूनतम तैयारी माना गया है, जबकि एक सप्ताह की आपूर्ति रखने से राहत पहुंचने में देरी होने पर परिवारों को अधिक समय तक सहायता मिल सकती है।
3. क्या ब्रिटेन और जापान की तैयारियां तीसरे विश्व युद्ध का संकेत हैं?
सिर्फ इन अभियानों के आधार पर ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ब्रिटेन ने बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों की चिंता जताई है, जबकि जापान की तैयारी में प्राकृतिक आपदाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। सरकारें कई तरह के जोखिमों के लिए तैयारी कर सकती हैं; इसका अर्थ यह नहीं कि युद्ध निश्चित या आसन्न है।
4. अमेरिका की FORTRESS योजना किससे संबंधित है?
उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, FORTRESS अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दीर्घकालीन संचालन क्षमता से जुड़ी प्रस्तावित पहल है। इसका उद्देश्य बिजली, पानी, ईंधन और संचार जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखना है, ताकि बाहरी आपूर्ति बाधित होने पर भी सैन्य ठिकाने काम कर सकें। इसे नागरिकों के राशन अभियान से अलग समझना चाहिए।
5. आपातकाल के लिए घर में कौन-सा सामान रखना उपयोगी है?
पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, जरूरी दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, कुछ नकदी और स्वच्छता से जुड़ी सामग्री उपयोगी हो सकती है। परिवार के सदस्यों के पहचान दस्तावेजों की प्रतियां और जरूरी फोन नंबर भी सुरक्षित रखें। सामान परिवार के सदस्यों की संख्या और स्थानीय जोखिम के अनुसार रखें।
6. क्या भारत में भी तीन दिन का आपातकालीन किट रखना चाहिए?
भारत में बाढ़, चक्रवात, भूकंप और अन्य स्थानीय आपदाओं के कारण कुछ समय के लिए सामान्य सेवाएं बाधित हो सकती हैं। इसलिए तीन दिन की बुनियादी जरूरतों का सामान रखना समझदारी है। यह किसी युद्ध की आशंका के कारण नहीं, बल्कि सामान्य आपदा प्रबंधन और परिवार की सुरक्षा के लिए उपयोगी तैयारी है।







