नई दिल्ली में आयोजित एजुकेशन फॉर भारत महाकुंभ कार्यक्रम इस बार भी छात्रों, शिक्षाविदों और खेल जगत के नामी हस्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम में शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई शिक्षा नीति और युवाओं के भविष्य से जुड़े कई पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और धाकड़ ओपनर वीरेंद्र सहवाग इस कॉन्क्लेव में शामिल हुए और उन्होंने खेल और शिक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया – उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कोचिंग का ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।

सहवाग ने बताया कि यह ऑफर भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर की ओर से आया था। उन्होंने इस अवसर पर खिलाड़ियों और युवा छात्रों को प्रेरित करने वाले कई महत्वपूर्ण संदेश भी दिए।
हरमनप्रीत कौर से जुड़ा कोचिंग ऑफर
सहवाग ने साझा किया कि काफी समय पहले उन्होंने हरमनप्रीत कौर से मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि हो सकता है एक दिन वह टीम इंडिया की कप्तान बन जाएँ। समय ने उनके इस भविष्यवाणी को सच कर दिखाया और हरमनप्रीत भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बनीं।
कप्तानी मिलने के बाद हरमनप्रीत ने सहवाग को कॉल किया और उन्हें कोच बनने का प्रस्ताव दिया। सहवाग ने बताया कि उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि वह उस समय इस पद के लिए योग्य नहीं हैं। सहवाग ने युवाओं को यह उदाहरण देकर समझाया कि कभी भी अवसर मिलने पर सही निर्णय लेने की आवश्यकता होती है और हर खिलाड़ी की अपनी समय-सीमा होती है।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 2025 के वनडे विश्व कप का खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। सहवाग ने कहा कि इस जीत से स्पष्ट होता है कि टीम में क्षमता, समर्पण और सही नेतृत्व की कितनी अहमियत है।
खेल से प्यार और मानसिक स्वास्थ्य
सहवाग ने अपने अनुभवों के माध्यम से खेल और जीवन में संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “अगर हमें खेल से सच्चा प्यार है, तो हम डिप्रेशन में नहीं जा सकते। हमें अपने काम में संतोष और खुशी ढूँढनी चाहिए, और पैसे को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए।”
उन्होंने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए बताया कि साल में केवल 70 दिन काम करना और बाकी समय मानसिक स्वास्थ्य, परिवार और व्यक्तिगत संतोष के लिए रखना भी जरूरी है। इस सत्र में सहवाग ने छात्रों के लिए गाने का छोटा सा इंटरैक्शन भी किया और ‘चला जाता हूं किसी के धुन में’ गाना गुनगुनाया।
बच्चों को नाकामी से निपटना सिखाना जरूरी
सहवाग ने कहा कि बच्चों को सफलता के बजाय स्किल्स और अनुभव पर ध्यान केंद्रित करने की शिक्षा देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अच्छे अंक और प्रतियोगिताओं में सफलता ही नहीं, बल्कि जीवन में असफलताओं का सामना करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
“हमारे स्कूलों में मैं कोशिश करता हूँ कि बच्चों को एक स्किल जरूर सिखाई जाए, जो उनके भविष्य में काम आए। किताब और जीवन का अनुभव अलग-अलग हैं। इसलिए बच्चों को असफलताओं से निपटना सिखाना बहुत जरूरी है,” सहवाग ने कहा।
व्यक्तिगत अनुभव और प्रेरणा
सहवाग ने अपने जीवन और करियर के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें भी क्रिकेट टीम से ड्रॉप किया गया था, लेकिन वे निराश नहीं हुए। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि अपने अनुभव और उम्मीदों पर भरोसा रखो।
“मैंने अपनी उम्मीदों पर काम किया और खुद को खुश रखा। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिली। यही मैं युवाओं को सिखाना चाहता हूँ,” सहवाग ने बताया।
इस सत्र के दौरान उन्होंने खेल, शिक्षा और जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को साझा किया और बताया कि कैसे निरंतर अभ्यास, सही सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण से सफलता हासिल की जा सकती है।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश
सहवाग ने विशेष रूप से छात्रों और युवा खिलाड़ियों को यह सलाह दी कि वे अपने करियर में अपने जुनून का पालन करें, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और हमेशा सीखने की इच्छा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि खेल, शिक्षा और जीवन में संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सत्र के अंत में सहवाग ने सभी उपस्थित युवाओं से कहा कि असफलताओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सीखने का अवसर मानना चाहिए।
