एक चार वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले को झकझोर कर रख दिया है। इस मासूम की जान एक ऐसे सिरप ने ले ली, जिसे उसकी माँ ने सर्दी-खाँसी से राहत पाने के लिए खरीदा था — लेकिन कौन जानता था कि वही सिरप उसकी आखिरी खुराक बन जाएगा।

कुण्डीपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली 4 वर्षीय अंबिका विश्वकर्मा को बीते सप्ताह तेज खांसी-बुखार हुआ। स्थानीय चिकित्सक ने घर पर देखभाल की सलाह दी, लेकिन परिवार ने पास के मेडिकल स्टोर से “कोल्ड्रिफ सिरप” (Batch No. SR-13) खरीद लिया। दवा देने के कुछ ही घंटों के भीतर बच्ची की तबियत बिगड़ने लगी। उल्टी, सांस लेने में तकलीफ और फिर बेहोशी — परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद खुला मिलावट का जाल
शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण “टॉक्सिक पदार्थ” बताया गया। इसके बाद पुलिस ने सिरप की सैंपलिंग कर लैब में जाँच कराई। रिपोर्ट आने पर सनसनी फैल गई — सिरप में खतरनाक रासायनिक तत्व “डाईएथिलीन ग्लाइकोल” और “एथिलीन ग्लाइकोल” की मिलावट पाई गई, जो शरीर में पहुंचने पर किडनी और लीवर को क्षतिग्रस्त कर देता है।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आशीर्वाद मेडिकल स्टोर के संचालक अनिल कुमार मिश्रा और फार्मासिस्ट अशोक मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के बेचा गया था — जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 का सीधा उल्लंघन है।
नौवीं गिरफ्तारी और बढ़ी सख्ती
यह मामला जिले में जहरीले सिरप कांड से जुड़ी नौवीं गिरफ्तारी है। इससे पहले भी इस मामले में डॉक्टर प्रवीण सोनी और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया था। डॉ. सोनी पर आरोप था कि वे मरीजों को वही सिरप लिखते थे जो उनकी पत्नी के मेडिकल स्टोर में बिकता था।
अब तक 23 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने पूरे जिले में कफ सिरप की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है। औषधि विभाग की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।
मौतों की भयावह श्रृंखला
23 मासूमों की मौत ने पूरे मध्य प्रदेश को हिला दिया था। लगभग हर केस में यही सिरप — कोल्ड्रिफ — मिला। रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि कई सिरप बैच नकली थे और उनमें मिलावट के कारण किडनी फेल्योर के लक्षण सामने आए। कई बच्चों को नागपुर और भोपाल भेजा गया, लेकिन कई ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यह सब उस सिस्टम की पोल खोलता है जो नियमों के बावजूद नकल और मुनाफाखोरी के खेल को रोक नहीं सका।
प्रशासन और सरकार की भूमिका
मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा —
“हम हर दोषी को सजा दिलाएंगे। बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई माफी नहीं।”
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कफ सिरप निर्माण कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स का लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिया है। साथ ही सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी दवा को बिना वैध बिल और बैच नंबर के न बेचा जाए।
स्थानीय लोगों का आक्रोश
कुण्डीपुरा के लोगों में आक्रोश है। हर गली में चर्चा है कि अगर प्रशासन पहले सख्ती दिखाता तो शायद मासूम अंबिका आज जिंदा होती।
परिजन अब न्याय की मांग कर रहे हैं। अंबिका की माँ ने कहा —
“हमने तो बस अपनी बेटी की खांसी का इलाज करना चाहा था… हमें नहीं पता था कि वही दवा उसकी जान ले लेगी।”
औषधि नियंत्रण की कमजोरियां
यह घटना सिर्फ छिंदवाड़ा की नहीं, बल्कि पूरे देश की दवा निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़ा करती है। छोटे शहरों में बिना डॉक्टर के पर्चे दवाओं की बिक्री आम बात है। ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी और निगरानी में ढिलाई के कारण नकली दवाओं का जाल पनप रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को “फार्मेसी चेक पोर्टल” जैसी तकनीकी प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि हर दवा की ट्रेसिंग संभव हो सके।
सख्त कानून की जरूरत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत दी जाने वाली सजा पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में गैर-इरादतन हत्या की धारा के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके।
समाज और मीडिया की भूमिका
मीडिया ने इस मामले को उठाकर न केवल न्याय की लड़ाई को ताकत दी बल्कि दवा उद्योग की अंदरूनी गंदगी को भी उजागर किया।
सोशल मीडिया पर “#JusticeForAmbika” और “#BanToxicCoughSyrups” जैसे ट्रेंड्स चल रहे हैं। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि ऐसी हर दवा का उत्पादन तुरंत रोका जाए और दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
