उत्तर प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर देश को झकझोर देने वाली साजिश का पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसियों की पूछताछ में सामने आया है कि आतंकियों का एक सक्रिय मॉड्यूल अयोध्या और वाराणसी जैसे धार्मिक व सांस्कृतिक शहरों को निशाना बनाने की तैयारी में था। इस साजिश में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे पवित्र स्थलों को उड़ाने की प्लानिंग की गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, इन आतंकियों का मकसद केवल धार्मिक स्थलों पर हमला करना नहीं था, बल्कि ऐसी जगहों को निशाना बनाना था जहाँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान जाए — जैसे अस्पताल, बाजार और बस अड्डे। यह योजना महीनों से तैयार की जा रही थी, जिसमें स्थानीय स्लीपर सेल को एक्टिव किया गया था।
कैसे हुई साजिश का खुलासा
पिछले कुछ महीनों में यूपी, दिल्ली, बिहार और झारखंड से कई संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी। इन्हीं की पूछताछ से धीरे-धीरे परतें खुलनी शुरू हुईं। पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार आतंकी शाहीन, जो इस मॉड्यूल का अहम हिस्सा था, ने अयोध्या में स्लीपर सेल को फिर से सक्रिय किया था।
आतंकियों की योजना थी कि दिसंबर से पहले किसी धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ा धमाका कर धार्मिक माहौल को बिगाड़ा जाए। लेकिन समय रहते एजेंसियों की सतर्कता ने इस साजिश को नाकाम कर दिया।
विस्फोटक और हथियार बरामद
अब तक जांच एजेंसियां 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद कर चुकी हैं। ये विस्फोटक देश के अलग-अलग हिस्सों से जुटाए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी भी करीब 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट गायब है। एजेंसियां लगातार इसकी तलाश में देशभर में छापेमारी कर रही हैं।
जांच के मुताबिक, यह विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल और फिर भारत में लाया गया था। आतंकियों ने इसे “फर्टिलाइज़र के रूप में” दाखिल किया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद इसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर विभिन्न ठिकानों पर जमा किया गया।
स्लीपर सेल का नेटवर्क कैसे फैला
जांच से पता चला कि आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों में स्लीपर सेल नेटवर्क खड़ा किया हुआ था। इनमें लखनऊ, फैजाबाद, गोरखपुर, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहर शामिल हैं। ये सभी सेल सोशल मीडिया और एनक्रिप्टेड चैट एप्स के जरिए संपर्क में रहते थे।
एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क युवाओं को “धर्म के नाम पर भड़काकर” अपने जाल में फंसा रहा था। कई छात्र और बेरोजगार युवक इनके झांसे में आ गए थे। इनको “सेवा कार्य” के बहाने प्रशिक्षित किया जा रहा था, जबकि असल में उन्हें विस्फोटक तैयार करने और ट्रिगर सेट करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी।
लाल किला धमाके से जुड़ा रहस्य
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हाल में हुए लाल किला विस्फोट की योजना दरअसल मूल योजना का हिस्सा नहीं थी। आतंकियों का कहना था कि वह ब्लास्ट गलती से हुआ। टाइमर या रिमोट डिवाइस सही तरीके से सेट नहीं किया गया था, जिससे विस्फोट जल्दी हो गया।
इस गलती के बाद एजेंसियां सतर्क हो गईं और कई जगह रेड की गईं। उसी के बाद अयोध्या-काशी वाले प्लान का खुलासा हुआ।
अस्पतालों को क्यों बनाया गया निशाना
आतंकियों ने अस्पतालों को इसलिए निशाना बनाया था क्योंकि वहाँ हर वक्त भीड़ रहती है — डॉक्टर, मरीज और उनके परिजन। एक विस्फोट से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती थी और आतंक का माहौल फैलाया जा सकता था।
इस साजिश में खासतौर पर वाराणसी और अयोध्या के सरकारी अस्पतालों को चुना गया था। इनमें मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और एक निजी अस्पताल का नाम भी सामने आया है।
केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका
एनआईए, एटीएस और आईबी की टीमों ने इस मामले में मिलकर काम किया। इन एजेंसियों ने सीमापार नेटवर्क की भी जांच शुरू की है। शुरुआती रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि इस पूरी साजिश के पीछे विदेशी फंडिंग हो रही थी।
मनी ट्रेल की जांच में अब तक कुछ संदिग्ध खातों की पहचान की गई है, जिनसे पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के देशों से रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
300 किलो विस्फोटक की तलाश जारी
एजेंसियों का कहना है कि यह 300 किलो अमोनियम नाइट्रेट बेहद खतरनाक मात्रा है। यदि इसका गलत इस्तेमाल होता, तो कई किलोमीटर तक तबाही मच सकती थी। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इसे कहाँ छिपाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह विस्फोटक संभवतः किसी ग्रामीण इलाके में जमीन के नीचे गाड़ा गया है, या फिर किसी गोदाम में रासायनिक उर्वरक के साथ छिपाया गया है।
जनता से अपील
उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत 112 या स्थानीय थाने को दें। सरकार ने यह भी कहा है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है। कई नेताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना न केवल आतंक की मानसिकता को दर्शाता है बल्कि यह भारत की एकता पर सीधा हमला है।
अयोध्या के साधु-संतों ने सरकार से मांग की है कि मंदिरों और धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा और बढ़ाई जाए। वहीं वाराणसी में गंगा आरती के दौरान शांति और एकता के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
जांच जारी, और भी गिरफ्तारी संभव
एजेंसियों का मानना है कि अभी इस मॉड्यूल के कुछ सदस्य फरार हैं। उनकी तलाश के लिए देशभर में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि किसी भी कीमत पर यह साजिश दोबारा न पनपे।
