मुख्य बातें
- EMI की देय तारीख निकलने के बाद एक दिन की देरी पर भी लोन की शर्तों के अनुसार पेनाल्टी या अन्य शुल्क लग सकते हैं।
- एक दिन की देरी से CIBIL स्कोर में कितनी गिरावट आएगी, इसका कोई तय नियम नहीं है। असर लेंडर की रिपोर्टिंग और क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करता है।
- आरबीआई के निर्देशों के अनुसार क्रेडिट संस्थानों को क्रेडिट ब्यूरो में जानकारी महीने में दो बार भेजनी होती है, न कि अनिवार्य रूप से हर सप्ताह।
- ऑटो-डेबिट फेल होने पर बकाया भुगतान करें, लेंडर से स्थिति की पुष्टि करें और भुगतान का प्रमाण सुरक्षित रखें।

लोन की EMI तय तारीख से एक दिन देर से जमा हुई है तो जरूरी नहीं कि आपका CIBIL स्कोर तुरंत गिर जाए। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि एक दिन की देरी को बैंक नजरअंदाज कर देगा। लोन की शर्तों के अनुसार आपसे लेट पेमेंट या पेनाल्टी चार्ज लिया जा सकता है। भुगतान बकाया रहने पर इसकी जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में भी दर्ज हो सकती है।
इस मामले में सबसे जरूरी बात यह समझना है कि EMI भुगतान की तारीख, बैंक की आंतरिक प्रक्रिया और क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जाने वाली जानकारी तीन अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए एक दिन की देरी का असर हर ग्राहक के लिए एक जैसा नहीं होता।
अगर आपके बैंक खाते से EMI का ऑटो-डेबिट नहीं हुआ है, तो भुगतान को लेकर बैंक की ओर से संदेश आने का इंतजार न करें। पहले लोन खाते में बकाया राशि की स्थिति जांचें और जरूरत पड़ने पर आधिकारिक माध्यम से भुगतान करें।
एक दिन की देरी पर क्या CIBIL स्कोर गिरेगा?
एक दिन की देरी होने पर CIBIL स्कोर में तत्काल और निश्चित गिरावट का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। क्रेडिट स्कोर का आकलन कई बातों के आधार पर होता है, जिनमें भुगतान का इतिहास, बकाया कर्ज, क्रेडिट उपयोग और अन्य जानकारियां शामिल हैं।
हालांकि, EMI की देय तारीख निकलने के बाद भुगतान बकाया रह सकता है। लेंडर अपनी रिपोर्टिंग प्रक्रिया के तहत इस स्थिति की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेज सकता है। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि एक दिन की देरी कभी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज नहीं होगी।
एक बार भुगतान छूटने और लंबे समय तक भुगतान न करने के प्रभाव में अंतर होता है। लगातार देरी या बार-बार EMI मिस होने से क्रेडिट हिस्ट्री पर ज्यादा नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एक दिन लेट होने पर पेनाल्टी लगेगी?
इसका जवाब आपके लोन एग्रीमेंट और बैंक की शुल्क नीति पर निर्भर करता है। यदि निर्धारित तारीख तक EMI जमा नहीं होती है, तो लेंडर लागू शर्तों के अनुसार लेट पेमेंट या पेनाल्टी चार्ज लगा सकता है। एक दिन की देरी पर शुल्क माफ होगा, इसकी कोई सामान्य गारंटी नहीं है।
इसलिए अपने लोन एग्रीमेंट में भुगतान की तारीख, विलंब शुल्क, ऑटो-डेबिट फेल होने के चार्ज और भुगतान में देरी से जुड़े नियम जरूर देखें। अगर देरी बैंक की तकनीकी समस्या के कारण हुई है, तो ग्राहक सेवा केंद्र में शिकायत दर्ज कर शुल्क माफी का अनुरोध किया जा सकता है।
पेनाल्टी पर दोबारा ब्याज नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत बैंक और अन्य विनियमित ऋणदाता लोन की शर्तों का पालन नहीं होने पर उचित पेनाल्टी चार्ज लगा सकते हैं। लेकिन इन पेनाल्टी चार्ज को मूल बकाया राशि में जोड़कर उस पर आगे ब्याज नहीं वसूला जा सकता।
आरबीआई के निर्देशों में पेनाल्टी चार्ज और पेनाल्टी ब्याज के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। पेनाल्टी चार्ज को सामान्य ब्याज की तरह लोन की बकाया मूल राशि में शामिल करके उस पर अतिरिक्त ब्याज लगाने की अनुमति नहीं है। शुल्क उचित और उल्लंघन के अनुपात में होना चाहिए। लेंडर को अपनी नीति और लागू शुल्क की जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी होती है।
क्रेडिट ब्यूरो को कितनी बार रिपोर्ट भेजते हैं बैंक?
क्रेडिट स्कोर को लेकर एक आम धारणा है कि बैंक हर सप्ताह क्रेडिट ब्यूरो को ग्राहक के भुगतान का रिकॉर्ड भेजते हैं। लेकिन आरबीआई के निर्देशों के अनुसार क्रेडिट संस्थानों को क्रेडिट सूचना महीने में दो बार अपडेट करनी होती है।
यह व्यवस्था 1 जनवरी 2025 से लागू हुई। इसके तहत क्रेडिट संस्थानों को हर महीने की 15 तारीख और महीने के अंतिम दिन की स्थिति के अनुसार जानकारी क्रेडिट सूचना कंपनियों को भेजनी होती है।
इसका मतलब है कि EMI भुगतान में देरी और क्रेडिट रिपोर्ट में उसका दिखाई देना हमेशा एक ही समय पर नहीं होता। रिपोर्ट अपडेट होने में कुछ समय लग सकता है। इसलिए यह मानना गलत होगा कि एक दिन की देरी होते ही उसी दिन CIBIL स्कोर निश्चित रूप से गिर जाएगा। दूसरी ओर, यह भी मानकर नहीं चलना चाहिए कि कम समय की देरी कभी रिपोर्ट नहीं होगी।
ऑटो-डेबिट फेल हो जाए तो क्या करें?
अगर बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने, तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से NACH/ECS के जरिए EMI नहीं कटती है, तो ये तीन कदम उठाएं।
1. बकाया EMI का भुगतान करें
सबसे पहले अपने बैंक या लोन कंपनी के आधिकारिक ऐप अथवा वेबसाइट पर जाकर लोन खाते की स्थिति जांचें। यदि EMI बकाया दिखाई दे रही है, तो उपलब्ध आधिकारिक माध्यम से भुगतान करें। भुगतान की रसीद या ट्रांजैक्शन आईडी सुरक्षित रखें। दोबारा भुगतान करने से पहले यह भी जांच लें कि पहले से कोई राशि खाते से कट तो नहीं गई है।
2. लेंडर से भुगतान की पुष्टि करें
बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करके पूछें कि EMI का भुगतान अपडेट हुआ है या नहीं। ऑटो-डेबिट क्यों फेल हुआ, बकाया राशि कितनी है और कोई अतिरिक्त शुल्क लगा है या नहीं, इसकी जानकारी लें। अगर भुगतान के बावजूद खाते में बकाया दिख रहा है, तो ट्रांजैक्शन का प्रमाण देकर शिकायत दर्ज करें।
3. ऑटो-डेबिट की समस्या ठीक कराएं
बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें और NACH/ECS मैंडेट की स्थिति जांचें। यदि खाते से EMI कटने के बावजूद लोन खाते में भुगतान अपडेट नहीं हुआ है, तो दोनों संबंधित संस्थानों से शिकायत करें। भविष्य में ऐसी समस्या से बचने के लिए EMI की तारीख से पहले खाते में पर्याप्त राशि रखना बेहतर है।
CIBIL रिपोर्ट में DPD का मतलब समझें
क्रेडिट रिपोर्ट में DPD यानी Days Past Due का उल्लेख होता है। यह बताता है कि संबंधित भुगतान कितने दिनों तक बकाया रहा। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में 000 का मतलब है कि उस रिपोर्टिंग अवधि में भुगतान समय पर दर्ज हुआ। 030 का अर्थ 30 दिन और 060 का अर्थ 60 दिन की देरी से संबंधित है।
DPD का रिकॉर्ड समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि लोन देने वाली संस्थाएं क्रेडिट रिपोर्ट देखकर आवेदक के भुगतान व्यवहार का आकलन करती हैं। हालांकि, किसी एक अंक के आधार पर भविष्य में लोन मिलने या न मिलने का फैसला तय नहीं होता। बैंक आय, मौजूदा कर्ज, क्रेडिट इतिहास और अपनी पात्रता शर्तों को भी देखता है।
गलत क्रेडिट रिपोर्टिंग हो तो शिकायत करें
कभी-कभी ग्राहक समय पर भुगतान कर देता है, लेकिन तकनीकी या रिकॉर्ड अपडेट की समस्या के कारण क्रेडिट रिपोर्ट में बकाया दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान से शिकायत करें।
इसके साथ ही जिस क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट में गलती दिखाई दे रही है, वहां भी विवाद दर्ज कराया जा सकता है। भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन आईडी जैसे प्रमाण संभालकर रखें। जांच के बाद गलती सही पाई जाती है तो संबंधित जानकारी में सुधार किया जाना चाहिए।
EMI की तारीख याद रखने के लिए मोबाइल रिमाइंडर लगाना और खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना छोटी लेकिन उपयोगी सावधानियां हैं। एक दिन की देरी को मामूली समझकर छोड़ने के बजाय तुरंत भुगतान और रिकॉर्ड की पुष्टि करना बेहतर है।
FAQ’s
1. क्या एक दिन लेट EMI भरने से CIBIL स्कोर तुरंत कम हो जाता है?
नहीं, एक दिन की देरी से स्कोर में तत्काल कितनी गिरावट आएगी, इसका कोई निश्चित नियम नहीं है। इसका प्रभाव लेंडर की रिपोर्टिंग, भुगतान की स्थिति और आपकी पूरी क्रेडिट हिस्ट्री पर निर्भर करता है। फिर भी देरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि बकाया भुगतान की जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो सकती है।
2. क्या बैंक EMI के लिए ग्रेस पीरियड देने के लिए बाध्य है?
नहीं। सभी लोन के लिए एक समान अनिवार्य ग्रेस पीरियड नहीं होता। कुछ बैंक या वित्तीय संस्थान अपनी नीति के अनुसार अतिरिक्त समय दे सकते हैं, लेकिन इससे पेनाल्टी अपने आप माफ नहीं होती। ग्राहक को अपने लोन एग्रीमेंट और संबंधित बैंक की शर्तें जांचनी चाहिए।
3. EMI बाउंस होने पर बैंक कौन-कौन से चार्ज लगा सकता है?
लोन की शर्तों के अनुसार बैंक लेट पेमेंट या पेनाल्टी चार्ज लगा सकता है। ऑटो-डेबिट या NACH मैंडेट फेल होने पर लागू नियमों के तहत रिटर्न चार्ज भी लग सकता है। वास्तविक शुल्क बैंक की नीति और आपके एग्रीमेंट पर निर्भर करता है। भुगतान से पहले बकाया राशि और लगाए गए शुल्क का विवरण जांचें।
4. CIBIL रिपोर्ट में DPD 000 और 030 का क्या मतलब है?
DPD का पूरा नाम Days Past Due है। रिपोर्ट में 000 का अर्थ है कि संबंधित अवधि में भुगतान समय पर दर्ज हुआ। 030 आमतौर पर 30 दिन की देरी को दर्शाता है। इसी तरह 060 का अर्थ 60 दिन की देरी है। यह जानकारी लेंडर को आपके भुगतान व्यवहार का आकलन करने में मदद करती है।
5. EMI का पैसा कट गया लेकिन बैंक बकाया दिखा रहा है तो क्या करें?
सबसे पहले बैंक स्टेटमेंट और भुगतान की रसीद जांचें। ट्रांजैक्शन आईडी के साथ लोन देने वाली संस्था में शिकायत दर्ज करें। यदि भुगतान बैंक खाते से कट चुका है, तो दोबारा EMI जमा करने से पहले उसकी स्थिति स्पष्ट कर लें। शिकायत का संदर्भ नंबर और बैंक का जवाब सुरक्षित रखें।
6. क्रेडिट रिपोर्ट में गलत डिफॉल्ट दिखे तो उसे कैसे ठीक कराएं?
जिस बैंक या वित्तीय संस्था ने गलत जानकारी भेजी है, वहां लिखित शिकायत करें। संबंधित क्रेडिट ब्यूरो में भी विवाद दर्ज कराएं और भुगतान का प्रमाण संलग्न करें। दोनों जगह शिकायत की स्थिति पर नजर रखें। यदि समस्या का समाधान नहीं होता, तो लागू शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत आगे शिकायत की जा सकती है।







