बैतूल (मध्यप्रदेश): बैतूल जिले के आमला रेलवे स्टेशन पर मंगलवार शाम एक 14 वर्षीय छात्र को माल गोदाम के पास हाथ बंधे और मुंह में कपड़ा ठूंसे हुए देखा गया। मामला देखते ही पुलिस हरकत में आई, लेकिन जांच में सामने आया कि यह कोई अपहरण नहीं, बल्कि मां की डांट से बचने के लिए रचा गया एक फिल्मी ड्रामा था।

जीआरपी थाना प्रभारी प्रमोद पाटिल ने बताया कि एक महिला ने प्लेटफार्म नंबर पांच के पास गोदाम की ओर एक बालक को पड़ा देखा, जिसके हाथ कपड़े की चिंदी से बंधे थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। महिला ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद आमला थाना प्रभारी राजेश सातनकर और जीआरपी टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
पूछताछ में छात्र ने बताया कि उसके पिता नहीं हैं और वह एक निजी स्कूल में कक्षा नौवीं में पढ़ता है। स्कूल से जानकारी मिली कि वह पिछले 20 दिनों से कक्षा में नहीं आ रहा था। जब उसकी मां को इसका पता चला तो उन्होंने उसे डांटा। डांट से बचने के लिए छात्र ने खुद को अपहृत दिखाने की पूरी योजना बनाई — हाथ बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और रेलवे गोदाम के पास जाकर लेट गया।
पुलिस ने सच्चाई सामने आने के बाद बालक को उसकी मां के हवाले कर दिया। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या इस नाटक में किसी और की भूमिका रही या नहीं।
